शाहाबाद। ग्लेंडर्स रोग से ग्रसित घोड़ा मिलने से पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है। शनिवार को पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में डॉ. जयनारायण शर्मा, डॉ. ऊषा सैनी तथा डॉ. विवेक की टीम शाहाबाद पहुंची। टीम शाहाबाद निवासी राजाराम से बीमारी से ग्रसित घोड़े को लेकर बराड़ा रोड पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मौत की नींद सुलाकर गड्ढे में दफन कर दिया। पत्रकारों से बातचीत में पशु चिकित्सक डॉ. रघुबीर सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के पास सैंपल भेजे गए थे, जिसमें से ग्लेंडर्स रोग का एक सैंपल पॉजीटिव पाया गया। उन्होंने बताया कि यह एक खतरनाक बीमारी है, जोकि गधे, घोड़े एवं खच्चरों में पाई जाती है। पशुओं के नाक एवं आंख से पानी बहना और खांसी होना इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं। यह छूत की बीमारी है, जो बड़ी ही तेजी से फैलती है। यही नहीं, इस बीमारी की चपेट में व्यक्ति भी आ सकता है। लाइलाज बीमारी होने के चलते इसके चपेट में आने वाले पशु एवं व्यक्ति का मरना तय है। शाहाबाद एरिया के 28 गांवों में लगभग 109 अश्व प्रजाति के पशु मौजूद हैं। उन्होंने पशु पालकों को चेताया कि वे अपने पशुओं के सैंपल भेजकर जल्द ही जांच कराएं। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, पशुओं से ज्यादा काम न लेते हुए उन्हें आराम दें। दूसरी ओर राज्य सरकार ने कुरुक्षेत्र जिला को अश्व प्रजाति के पशुओं में ग्लेंडर्स रोग से बचाव एवं नियंत्रण के लिए नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया है। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग की तरफ से पशु संक्रामक एवं संसर्गजन्य रोग निवारण और रोकथाम अधिनियम 2009 के तहत अधिसूचना जारी की है। इसके तहत जिला के अश्व प्राजाति के पशुओं में ग्लेंडर्स रोग से बचाव, नियंत्रण के लिए नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया है। घोड़े, गधे, खच्चर एवं अश्व प्रजाति के अन्य पशुओं को एक जगह से किसी अन्य स्थान पर आवाजाही प्रतिबंधित किया है। इन पशुओं की दौड़, मेले, प्रदर्शनी, खेल आयोजन तथा एकत्रित करने पर भी प्रतिबंध है।