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आशा वर्करों सहित अन्य कर्मियों का जेल भरो आंदोलन

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700 आशा वर्करों को देनी थी गिरफ्तारी, फार्म कम पड़े, तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने सामूहिक गिरफ्तारी और रिहाई की घोषणा की
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
जिले भर की 700 से अधिक आशा वर्करों सहित विभिन्न विभागों के करीब दो हजार कर्मचारियों ने मंगलवार को गिरफ्तारी दी। इसके लिए कर्मचारी सुबह ही सड़कों पर उतर आए और रोष व्यक्त किया। ताज पार्क के बाद जिला सचिवालय में गिरफ्तारी देने पहुंचीं आशा वर्करों और अन्य कर्मियों को प्रशासनिक अधिकारी पुलिस लाइन ले गए। वहां भी सभी ने करीब दो घंटे तक रोष जताया। इसके बाद कर्मचारी सामूहिक रूप से गिरफ्तारी पर अड़ गए। इस पर मौजूद डीएसपी सहित अन्य अधिकारी बगलें झांकने लगे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी असहाय दिखे। अधिकारियों को इतनी व्यवस्था न होने पर सफाई देनी पड़ी। इस दौरान महज 20 आशा वर्करों की कागजी तौर पर गिरफ्तारी हो सकी। अन्य के लिए फार्म कम पड़ गए। अव्यवस्था बढ़ती देख ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार कृष्ण लाल ने सामूहिक गिरफ्तारी और इसके बाद उन्हें निजी मुचलके पर रिहा करने की घोषणा कर दी। इसके बाद ही कर्मचारी जिला सचिवालय पर धरना लगातार जारी रखने के एलान के साथ शांत हुए और लौट गए।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर कर्मचारी संगठनों इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, एसकेएस हरियाणा, हरियाणा कर्मचारी महासंघ, हरियाणा संयुक्त कर्मचारी मंच, हरियाणा बैंक एंप्लाइज फेडरेशन के आह्वान पर मंगलवार को जेल भरो आंदोलन किया गया। इसके लिए 18 जनवरी से हड़ताल पर उतरी आशा वर्कर और अन्य विभागों के कर्मचारी सुबह ही सेक्टर-10 ताज पार्क में एकत्रित हो गए। यहां जमकर रोष जताने के बाद जुलुस निकालते हुए यह कर्मचारी जिला सचिवालय गिरफ्तारियां देने पहुंचे। यहां पर भी धरना देते हुए कई घंटे तक जमकर रोष व्यक्त किया। केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की। इसके बाद आंदोलनरत कर्मचारियों ने प्रशासन द्वारा मौके पर ही लाई गईं हरियाणा रोडवेज बसों में सवार होते हुए गिरफ्तारी दीं। यहां से सभी को पुलिस लाइन ले जाया गया। वहां दो घंटे तक यह कर्मचारी सामूहिक रूप से जेल जाने की बात पर अड़े रहे। हालांकि, पुलिस ने 10-10 कर्मचारियों की कागजी कार्रवाई करीब डेढ़ घंटे बाद करनी शुरू की। लेकिन, केवल 20 प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर अन्य कर्मचारी भड़क गए और सामूहिक रूप से जेल में जाने पर अड़ गए। इस दौरान डीएसपी से लेकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर तैनात नायब तहसीलदार कृष्ण लाल तक ने उन्हें शांत करने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में जब आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की संख्या में पुलिस प्रशासन के पास संबंधित फार्म भी कम पड़ गए तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट को आगे आना पड़ा। उन्होंने सामूहिक तौर पर कर्मचारियों की गिरफ्तारी और जेल जाने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें रिहा करने की घोषणा कर दी। हालांकि, वह अपने संबोधन से कर्मचारियों को शांत नहीं कर पाए। इसके बाद डीएसपी ने यह घोषणा की तो कर्मचारियों ने प्रदर्शन समाप्त करने का एलान किया।
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जिला सचिवालय पर जारी रहेगा धरना
पुलिस लाइन में मंगलवार को किए गए जेल भरो प्रदर्शन को समाप्त करने के दौरान आशा वर्कर यूनियन नेता रानी देवी ने एलान किया कि उनका जिला सचिवालय में धरना पहले की तरह ही जारी रहेगा। बुधवार को भी जिले भर की आशा वर्कर धरना देंगी। इस दौरान प्रदर्शन भी किया जाएगा।
भारी पुलिस बल रहा तैनात
आशा वर्करों के साथ-साथ अन्य विभागों के कर्मचारियों द्वारा चलाए गए जेल भरो आंदोलन के दौरान ताज पार्क से लेकर जिला सचिवालय और पुलिस लाइन में भी डीएसपी राज सिंह के नेतृत्व में हर प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंधों के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा।
इन कर्मचारियों ने किया प्रदर्शनकारियों को संबोधित
प्रदर्शनकारियों को एसकेएस के जिला प्रधान सुरेश गुढ़ा, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान श्रीचंद, सीआईटीयू के प्रधान महाबीर सिंह दहिया, एचआईपीसी वर्कर यूनियन के राज्य सचिव जितेंद्र बंसल, एचएसईबी के उपप्रधान बलवंत सिंह, नगर परिषद राज्य कमेटी सदस्य सुभाष गुंसर, कर्मचारी महासंघ के अमरीक सिंह चट्ठा, रिटायर कर्मचारी संघ के ओम सिंह, मान सिंह, आशा वर्कर नेता रानी देवी आदि ने संबोधित किया।
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इन विभागों के कर्मचारी रहे शामिल
जेल भरो आंदोलन में आशा वर्करों के अलावा नगर परिषद, केयू मैस कर्मचारी, फायर ब्रिगेड कर्मचारी, जनस्वास्थ्य, हरियाणा रोडवेज, पीडब्ल्यूडी, अध्यापक संघ, केेयू गैर शिक्षक संघ आदि के कर्मचारी शामिल रहे।
ये रहीं मुख्य मांगें
महंगाई पर रोक लगाई जाए।
राशन प्रणाली सर्वव्यापी बनाई जाए।
बेरोजगारी खत्म हो, सभी को स्थायी नौकरी दी जाए।
श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन न किए जाएं।
श्रम कानूनों का सख्ती से पालन किया जाए।
सभी कर्मियों को कम से कम 18 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए।
सभी को 30 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाए।
कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
स्थाई काम-स्थाई रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
ट्रेड यूनियनों का पंजीकरण 45 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए।
समान काम- समान वेतन दिया जाए आदि।
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