अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
कोई भी महान कार्य वीर हनुमान के बिना संपन्न नहीं किया जा सकता। महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण के रथ की ध्वजा भी भगवान श्रीराम भक्त हनुमान के हाथ में ही थी। यह विचार व्यक्त करते हुए भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जयराम संस्थाओं के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि करीब तीन दशक से हर वर्ष गीता जयंती कार्यक्रमों से पहले विद्यापीठ में विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ हनुमत ध्वजारोहण किया जाता है।
कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती के लिए भी मंगलवार को प्रदेश के कोने -कोने से आए महान संतों की मौजूदगी में श्री जयराम विद्यापीठ परिसर में विद्वान-ब्राह्मणों और ब्रह्मचारियों ने रामभक्त हनुमान का गुणगान किया गया। ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी के सानिध्य में विद्यापीठ गुरुओं की परंपरा के अनुसार ध्वजोरोहण कर विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ शुभारंभ किया गया। गीता जंयती के ध्वजारोहण के साथ ही मंगलवार से विद्यापीठ में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का भी शुभारंभ किया गया। विद्यापीठ में ध्वजारोहण से पूर्व सभी ट्रस्टियों, ब्रह्मचारियों और जयराम संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हनुमानजी का मंत्रोच्चारण करते हुए आह्वान कर विधिवत पूजन किया। साथ ही प्रसाद वितरण किया गया। ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि संकटमोचन हनुमान से निर्विघ्न गीता जयंती के आयोजनों की कामना करते हुए विद्यापीठ में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने, धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को स्वच्छ एवं हरित नगरी बनाने का संकल्प भी लिया गया। ब्रह्मचारी ने बताया कि हरवर्ष की भांति इस वर्ष भी गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर 28 नवंबर को गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह में उन सैनिकों और पूर्व सैनिकों के बेटियों को भी भागीदार बनाया जाएगा, जो किन्हीं कारणों से आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इस वर्ष विद्यापीठ के भव्य पंडाल में व्यासपीठ से 24 नंवबर से 30 नंवबर तक देश विदेश में विख्यात कथावाचक कृष्ण चंद ठाकुर वृंदावन वाले संगीतमयी शैली में श्रीमद भागवत पुराण की कथा करेंगे। ब्रह्मचारी ने बताया कि इस वर्ष भागवत कथा के साथ गीता के भी साक्षात दर्शन होंगे। ब्रह्मचारी ने बताया इसी के साथ 24 से 30 नबंवर तक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा गीता यज्ञ किया जाएगा। ध्वजारोहण कार्यक्रम में भारत साधु समाज के प्रदेशाध्यक्ष महंत बंसी पुरी, महंत तरण दास, महंत महेश मुनि, महंत रुद्र पुरी, महंत उत्तम गिरि, महंत जगन्नाथ पुरी, महंत महेश मुनि, संत ज्ञानेश्वर, महंत चमन गिरि, महंत विशाल दास, महंत भीम पुरी, स्वामी रोशन पुरी, स्वामी राजेंद्र दास, बुध सिंह, पूर्ण दास, आचार्य स्वामी भास्कर गिरि, प. विजय अत्रि, प. राजेंद्र पाराशर सहित अनेकों संत महापुरुष मौजूद थे। कार्यक्रम में डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा, देवेंद्र शर्मा, टीके शर्मा, जयभगवान शर्मा डीडी, पवन गर्ग, राजेंद्र सिंघल, केके कौशिक, श्रवण गुप्ता, कुलवंत सैनी, टेक सिंह लौहार माजरा, राजेश सिंगला, खरैती लाल सिंगला, डीके गुप्ता, ईश्वर गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, मुनीष मित्तल, अमीर चंद गोयल, प्रकाश मिश्रा, संतोष दहिया, सुनील गुप्ता, संतोष पासवान, केके गर्ग, संजीव गर्ग, विलायती राम नरुला, हीरा लाल, सुभाष नरुला, सौरभ चौधरी, डॉ. सुरेंद्र मेहता, केसी रंगा, पार्षद सतीश गर्ग, अनिल भंडारी, सतीश बतान, राजेंद्र पराशर, रणबीर भारद्वाज, राजेश लेखवार शास्त्री आदि भी मौजूद थे।