गुरुकुल के ‘प्राकृतिक कृषि मॉडल’ से पौध तैयार करेगा वन विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गुरुकुल कुरुक्षेत्र के संरक्षक और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के ‘जीरो बजट प्राकृतिक कृषि’ मॉडल को देशभर के कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने सराहा है। अब प्रदेश वन विभाग गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि मॉडल को विस्तार देते हुए विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों की पौध तैयार करेगा। इस संदर्भ में प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक जगदीश चंद्र, जिला वन अधिकारी सूरजभान और दीपक नंदा के साथ मंगलवार को गुरुकुल पहुंचे और यहां केंचुआ खाद निर्माण-केंद्र के साथ जीवामृत और घनजीवामृत की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर गुरुकुल के प्रधान कुलवंत सिंह सैनी और कृषि अधिकारी गुरदीप सिंह भी मौजूद रहे। गुरुकुल के सह-प्राचार्य शमशेर सिंह ने बताया कि गुरुकुल के भ्रमण के बाद मुख्य वन संरक्षक जगदीश चंद्र ने गुरुकुल के कैंथला स्थित 180 एकड़ ‘प्राकृतिक कृषि फार्म’ पर गेंहू, गन्ने सहित विभिन्न सब्जियों की फसलों का अवलोकन किया। कृषि विशेषज्ञ डॉ. वजीर सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों को ‘जीरो बजट प्राकृतिक-कृषि’ की जानकारी दी। बताया कि पारंपरिक खेती की इस पद्धति में किसान को बाजार से कुछ भी खरीदना नहीं पड़ता। साथ ही देशी गाय का भी संरक्षण होता है। क्योंकि, ‘जीरो बजट प्राकृतिक कृषि’ में देशी गाय के गोबर और गोमूत्र की भूमिका अहम है। मुख्य वन संरक्षक जगदीश चन्द्र ने माना कि वास्तव में गुरुकुल कुरुक्षेत्र में महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपनी अनथक मेहनत से अनूठा कृषि मॉडल तैयार किया है जिसे अपनाकर किसान समृद्ध और खुशहाल बनेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा वन विभाग में जल्द ही गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि मॉडल से पौध तैयार की जाएगी।