अभिव्यक्ति की छटपटाहट है भाषा : उर्मि कृष्ण
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के सहयोग से भाषा परिष्कार कार्यशाला का आयोजन विद्या भारती के नैमिषारण्य सभागार में किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार उर्मि कृष्ण, अंबाला ने की। कार्यशाला में जिला पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल के प्रतिभागी शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला में कुरुक्षेत्र और कैथल जिलों का प्रतिनिधित्व नहीं रहा। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार उर्मि कृष्ण ने कहा कि हमारे अंदर जो विचार होते हैं, बोलने की इच्छा होती है, वह भाषा ही है। भाषा अभिव्यक्ति की छटपटाहट है।
उन्होंने कहा कि भाषा के परिष्कार का अर्थ है सुधार, उन्नति प्रगति। जैसे-जैसे मनुष्य की सभ्यता बढ़ती है, वैसे-वैसे भाषा का सुधार होता रहता है। कुछ दूरी के अंतराल में भाषा में अंतर आ जाता है। कुछ नए शब्द जुड़ जाते हैं, तो कुछ पुराने शब्द आ जाते हैं। भाषा सीखना और इसे शुद्ध रूप में बोलना इसमें थोड़ा अंतर आ जाता है। उन्होंने हिंदी भाषा की कुछ परिभाषाएं देते हुए कहा कि वाणी मनुष्य को प्रकृति का अनमोल उपहार है। समाज, व्यक्ति, देश सभी के बीच विचार व्यक्त करने का साधन है भाषा।
विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने कहा कि भाषा राष्ट्र की सशक्त पहचान होती है, क्योंकि इसमें संबंधों को बांधने की सबल शक्ति विद्यमान होती है। डॉ. लालचंद गुप्त मंगल ने कहा कि हिंदी की स्थिति तीन रूपों में देखी जा सकती है। राष्ट्र भाषा के रूप में, राजभाषा के रूप में और विश्व भाषा के रूप में। विषय विशेषज्ञ अशोक बत्रा ने कहा कि मंच की भाषा, कक्षा की भाषा और आम बोलचाल की भाषा में अंतर होता है। जो इसमें सम्प्रेषण बनाए रखता है वही श्रेष्ठ है। इस अवसर पर मंच पर विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह, विषय विशेषज्ञ डॉ. लालचंद गुप्त मंगल, हरियाणा साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. राधेश्याम शर्मा, हिंदू महाविद्यालय रोहतक के पूर्व प्राचार्य डॉ. अशोक बत्रा, हरियाणा साहित्य अकादमी की निदेशक डॉ. कुमुद बंसल उपस्थित थे।