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बीमार व्यवस्था के सहारे जगाई जा रही है बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद

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राजेश शांडिल्य
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कुरुक्षेत्र।
बीमार व्यवस्था के सहारे राज्य सरकार की ओर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं देने का नुक्सा मरीजों का मर्ज बढ़ा रहा है। आलम ये है कि पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक बड़ी संख्या में मेडिकल आफिसर और विशेषज्ञों का टोटा है। यही स्थिति जिला के एकमात्र पॉलिक्लीनिक की है। कुरुक्षेत्र के सेक्टर चार स्थिति इस पॉलिक्लीनिक की स्थापना से लेकर अब तक एक्सरे की सुविधा नहीं मिल रही, क्योंकि पहले यहां एक्सरे मशीन नहीं थी। पांच महीने पहले स्वास्थ्य विभाग ने यहां एक्सरे मशीन का प्रबंध किया, मगर अब तक रेडियोग्राफर का पद खाली होने के कारण इस पर धूल जम रही है। जिला की सीएचसी और पीएचसी के अलावा कुरुक्षेत्र सिटी में स्थित जिस लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में करीब 2000 ओपीडी हो रही है, वहां एमओ और विशेषज्ञ नहीं हैं। एलएनजेपी अस्पताल में 42 स्वीकृत पदों पर 36 मेडिकल आफिसर ही सेवाओं में हैं। इनके अलावा नाक, कान गला विशेषज्ञ का पद पिछले दो वर्षों से खाली है। यही हालत चर्म रोग विशेषज्ञ की है। एलएनजेपी अस्पताल में पिछले एक साल से चर्म रोग विशेषज्ञ के कमरे पर ताला जड़ा है। सबसे बुरी स्थित झांसा ब्लाक की है। यहां चार मेडिकल आफिसर और एक एसएमओ की जगह सिर्फ एक एसएमओ और एक एमओ कार्यरत है। शाहाबाद में सात में से डाक्टरों के तीन पद खाली हैं। लाडवा में छह मेडिकल आफिसर की जगह सिर्फ एक मेडिकल आफिसर और एक एसएमओ के भरोसे पूरे लाडवा क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही है। पिहोवा में तीन मेडिकल आफिसर और एक एसएमओ का पद खाली है। इस्माईलाबाद पीएचसी सिर्फ एक मेडिकल आफिसर के सहारे छोड़ दी गई है। गौरतलब है कि आठ जून को हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने कई तबादले किए हैं। इनमें झांसा सीएचसी की डेंटल सर्जन डॉ.अमिता बतरा का तबादला अंबाला किया गया है, जबकि सीएचसी पहले ही डाक्टरों की कमी से जूझ रही है। यहां कोई भी नियमित एमओ नहीं है। इस सीएचसी में चार मेडिकल आफिसरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इन स्वीकृत पदों पर एक भी मेडिकल आफिसर नहीं है। इनकी जगह सेवानिवृत्त सीएमओ डॉ.टीपी नागर कंस्लटेंट के रूप में काम देख रहे हैं। एक मेडिकल आफिसर धुराला पीएचसी से 14 दिन के लिए डेपुटेशन पर लगाया गया था। इनके 14 दिन का कार्यकाल भी खत्म हो चुका है। झांसा सीएचसी के अधीन पीएचसी ठोल में दो मेडिकल आफिसरों के पद स्वीकृत हैं और दोनों के पद रिक्त पड़े हैं। पीएससी कलसाना में मेडिकल आफिसर का एक पद स्वीकृत है और वह भी रिक्त है। इधर पीएचसी डीग में एमओ का पद रिक्त हैं, यहां भी एक ही मेडिकल आफिसर का पद स्वीकृत है। यहां की मेडिकल आफिसर पीजी करने के लिए जा चुकी हैं। जब इस बारे में सीएमओ डॉ.एसके नैन से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि सरकार को लगातार डिमांड भेजी जा रही है। हर महीने स्वास्थ्य विभाग से डाक्टरों की कमी के साथ आवश्यक सुविधाओं के लिए पत्र व्यवहार किया जाता है, ताकि जिला वासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

शाहाबाद में दयनीय स्थिति
शाहाबाद के सामुदायिक केंद्र के हालात दयनीय होती जा रही है। यहां इलाज के लिए आने वाले रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की जगह धक्कों के अलावा कुछ नहीं मिलता। क्योंकि यहां के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों के 7 पद है जिनमें से 3 खाली पड़े थे लेकिन अब 4 चिकित्सकों में से भी 2 का तबादला हो गया है। ऐसे में यहां मात्र 2 चिकित्सक ही शेष हैं और उनमें से भी किसी न किसी की न्यायालय की ड्यूटी रहती है। ऐसे में कौन सा चिकित्सक इमरजेंसी को संभालेगा और कौन सा चिकित्सक ओपीडी देखेगा। यह सवाल अपने आप में बड़ा है। ऐसे में रोगी को यहां उपचार मिलने की संभावना भी व्यक्त नहीं की जा सकती। जिन चिकित्सकों का स्थानांतरित किया गया है उन चिकित्सकों में डॉ. नेहा और डॉ. गुरमीत शामिल हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिन में 8-8 घंटों की तीन शिफ्टों में आपात कालीन सेवाओं के लिए एक डाक्टर की ड्यूटी होती है लेकिन शाहाबाद अस्पताल में अब कैसे काम चलेगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अस्पताल की सफाई अनुबंध पर लगे 2 सफाई कर्मचारी ही कर रहे हैं जिस कारण अस्पताल की सफाई भी पूरे ढंग से नहीं हो पाती। गंदगी के कारण यहां वातावरण दूषित रहता है और पेयजल व्यवस्था भी सुदृढ़ नहीं है।
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शाहाबाद सीएचसी को अपग्रेड करने की जारी है प्रक्रिया
शाहाबाद स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 20 बेड से बढ़ाकर 100 बेड का करने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन फिलहाल इसमें सुविधाएं उपलब्ध न करवाए जाने से जनता परेशान है। इसी प्रकार अस्पताल में अल्ट्रासाउंड व पोस्टमार्टम सुविधा भी नहीं है। अस्पताल में सफाई व्यवस्था का भी बुरा हाल है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में न तो न तो कोई चाइल्ड स्पेशलिस्ट है, स्त्री रोग विशेषज्ञ, न आंख व कान चिकित्सक और न ही ही हड्डी व हृदय रोग विशेषज्ञ। चिकित्सकों की कमी के कारण ही यहां पहुंचने वाले सड़क हादसों के घायलों को पूरा उपचार देने की बजाए उन्हें तत्काल पीजीआई चंडीगढ़ भेज दिया जाता है। इसलिए इस अस्पताल का रोगियों को कोई फायदा नहीं हो रहा है।
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क्या कहते हैं एसएमओ
इस बारे में जब एसएमओ डॉ. रविंद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों व अन्य स्टाफ की कमी के बारे में वह आलाधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं। प्रयास है कि जल्द ही अस्पताल में चिकित्सक उपलब्ध हो जाएंगे ।

इन मेडिकल आफिसर को चुका है तबादला
डॉ.लक्षेंद्र सिंह एलएनजेपी कुरुक्षेत्र से सीएचसी पिहोवा भेजा गया है।
डॉ.आशीष कुमार शर्मा पीएचसी गुडा से सीएचसी कालका
डॉ.रचना बंसल (एलएमओ)एलएनजेपी से पॉलिक्लीनिक अंबाला
डॉ.राजेश गोयल को पीएचसी ठोल से अंबाला कैंट अस्पताल
डॉ.शिवनीत कौर भागल जिला कैथल से सीएचसी पिहोवा
डॉ.तेजेंद्र चौहान को जिला जेल कुरुक्षेत्र से सिविल अस्पताल नीलोखेड़ी भेजा गया है
डॉ.नीलम कपूर को एलएनजेपी से जिला क्षय केंद्र में भेजा गया है
डॉ.नेहा नरेश को सीएचसी शाहाबाद से पीएचसी हंगोला पंचकूला में भेजा गया

ये डेंटल सर्जन हुए स्थानांतरित
डॉ.करूणा ढींगड़ा को एलएनजेपी कुरुक्षेत्र पानीपत भेजा गया है
डॉ.विनय शंकर को पीएचसी डीग से जिला कैथल के रसीना पीएचसी में भेजा गया
डॉ.अमिता बतरा को सीएचसी झांसा से सिविल अस्पताल अंबाला कैंट
डॉ.माधुरी खुराना को सेक्टर चार कुरुक्षेत्र पॉलिक्लीनिक से अमीन पीएचसी भेजा गया है
डॉ.जय कुमार को अमीन पीएचसी से कुरुक्षेत्र सेक्टर-4 पॉलिक्लीनिक में लगाया गया है।
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