कुरुक्षेत्र। एनएचएम कर्मचारी संघ के आह्वान पर मंगलवार को जिले भर के करीब 450 एनएचएम कर्मी हड़ताल पर रहे। दो दिवसीय हड़ताल के चलते पहले ही दिन स्वास्थ्य सेवाएं गड़बड़ा गईं। मरीजों के तीमारदारों को एंबुलेंस जैसी सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ा। यहां तक कि परिजनों को पीजीआई चंडीगढ़ व अन्य अस्पतालों में रेफर किए गए मरीजों को ले जाने के लिए निजी वाहनों को किराए पर लेना पड़ा तो घंटों भर तक एंबुलेंस सेवाएं मिलने की बाट भी जोहनी पड़ी।
मंगलवार सुबह से ही एनएचएम कर्मियों ने सिविल अस्तपाल में मांगों को लेकर सरकार और विभाग के अधिकारियों के खिलाफ धरना देकर जमकर नारेबाजी की। संघ की प्रदेश सहसचिव कुलविंदर कौर ने बताया कि सरकार ने वादा करने के बावजूद उनकी कई मांगों को पूरा नहीं किया। इस कारण मजबूरन उन्हें हड़ताल पर उतरना पड़ा। खेद है कि हड़ताल के चलते मरीजों को परेशानी हुई, लेकिन इसके अलावा अपनी आवाज उठाने का उनके पास कोई रास्ता नजर नहीं आया। बताया गया कि जिलेभर के करीब 450 एनएचएम कर्मी प्रदर्शन में शामिल थे तो बाकी कर्मियों ने अवकाश रखा। वहीं एनएचएम की 130 एएनएम ने उन्हें समर्थन नहीं दिया।
5 वर्ष की बच्ची को पीजीआई ले जाने के लिए नहीं मिल पाई एंबुलेंस
सिविल अस्पताल में पांच वर्ष की बच्ची को लेकर पहुंची शाहाबाद निवासी मीरा ने बताया कि उसकी पोती अनमोल को पिछले कई दिनों से बुखार है। मंगलवार सुबह अनमोल को शाहाबाद सीएचसी में लेकर गए थे। यहां चिकित्सक ने प्राथमिक जांच के बाद एलएनजेपी अस्पताल रेफर कर दिया। वह निजी वाहन का प्रबंध करके सिविल अस्पताल पहुंचे थे। जहां चिकित्सकों ने बच्ची की प्राथमिक जांच कर पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया, लेकिन अस्पताल की ओर से पीजीआई के लिए एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं हुई।
चार घंटे से कर रहे एंबुलेंस का इंतजार : धनपती
गुमथला निवासी धनपती ने बताया कि उसकी पुत्रवधू काजल प्रसव पीड़ा के चलते पिहोवा सीएचसी ले जाया गया था। यहां चिकित्सकों ने गंभीर अवस्था के चलते एलएनजेपी अस्पताल रेफर कर दिया। यहां भी चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच कर करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया, लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। मंगलवार दोपहर करीब एक बजे से शाम चार बजे तक एंबुलेंस के लिए भटकते रहे, लेकिन उपलब्ध नहीं हो सकी।
एलएनजेपी अस्पताल में दाखिल 300 मरीजों का जिम्मा महज 32 स्टाफ नर्स पर
हड़ताल के दौरान एलएनजेपी सिविल अस्पताल में 32 स्थायी स्टाफ नर्स ने 300 से अधिक मरीजों की संभाल करनी पड़ी। बता दें कि गायनी विभाग में मंगलवार को शाम चार बजे तक 122 जच्चा-बच्चा दाखिल रहे। ऐसे में सिर्फ दो स्टाफ नर्स द्वारा मरीजों को संभालने के अलावा डिलिवरी कराने आई महिलाओं की देखरेख करना भी चुनौतीपूर्ण रहा। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह से शाम चार बजे तक कुल चार डिलिवरी हुई, जिसमें से एक सिजेरियन हुआ। वहीं आपातकालीन विभाग, एनसीडी, महिला व पुरुष वार्ड में सिर्फ एक-एक र्स्थायी स्टाफ नर्स सहित 16 प्रशिक्षण पर आए बीएमएस चिकित्सकों ने कमान संभाली।
यह है एनएचएम की मुख्य मांगे
-एनएचएम कर्मियों का नियमितीकरण, स्थायी सेवा सुरक्षा, सातवां वेतन आयोग, सेवा नियम संशोधन और सैलरी एक मुश्त करने सहित अन्य मांगे भी है।
स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से रखी गई जारी : सीएमओ
सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह ने दावा करते हुए कहा कि एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के संदर्भ में विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। हड़ताल के चलते आउटसोर्सिंग के तहत लगे 7 कर्मचारियों को एंबुलेंस की कमान सौंपी गई, जिसके बाद एंबुलेंस सेवाएं भी सुचारू रूप से जारी रही। सिविल अस्पताल सहित सभी सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं ज्यादा प्रभावित नहीं हुई।