सरकार मेहरबान : ज्ञानानंद को 45 लाख में दे दी पांच करोड़ की जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
सरकारी गीता केंद्र में थाना और स्वामी ज्ञानानंद की संस्था पर विशेष कृपा कर उनके गीता ज्ञान संस्थानम का माहौल सुहाना बनाने का काम केडीबी ने किया है। दरअसल, 22 साल पहले कांग्रेस के शासनकाल में ब्रह्मसरोवर तट पर एक भव्य परिसर में दुनियाभर से गीता पर शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने गीता केंद्र स्थापित किया था। इस गीता केंद्र का उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद ने एक दिसंबर 1995 में को किया था। ब्रह्मसरोवर पर जिस भवन को विशेष रूप से गीता केंद्र के लिए स्थापित किया गया। अब उस स्थान को केडीबी की अनदेखी के चलते आदर्श थाना पुलिस को 17 हजार 995 रुपये मासिक किराए पर सौंपा दिया गया है। साथ ही सरकार ने ज्ञानानंद के गीता ज्ञान संस्थान के लिए करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की करीब नौ एकड़ जमीन को महज 45 लाख रुपये में दे दिया है।
सत्ता में आने से पहले भाजपा नेता यहां फिर से गीता केंद्र स्थापित करने के दावे करते थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद ब्रह्मसरोवर पर बने गीता केंद्र को ही नेता भूल गए। इसकी जगह नया गीता शोध केंद्र स्थापित करने का जिम्मा स्वामी ज्ञानानंद महाराज की संस्था को दिया गया है। नतीजन राज्यपाल के आदेशों को नजरंदाज करते हुए केडीबी की नौ एकड़ भूमि स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को अलॉट कर दी गई। इस समय गीता ज्ञान संस्थान का निर्माण जारी है।
सरकार को दिख रही सिर्फ ज्ञानानंद की संस्था : गर्ग
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग तीन दिन पहले ही इस मामले में राष्ट्रपति को पत्र भेज चुके हैं। उनका कहना है कि केडीबी को गीता केंद्र स्थापित करने के नाम पर निजी संस्थाओं में सिर्फ ज्ञानानंद की संस्था दिखाई दे रही है। इस पक्षपात के चलते ही नियमों को दरकिनार कर नौ एकड़ जगह गीता ज्ञान संस्थानम के लिए दे दी गई है। गीता के प्रचार के नाम पर स्वामी ज्ञानानंद की 600 रुपये वाली ‘गीता प्रेरणा’ पुस्तक नजर आती है। गौरतलब है कि गीता ज्ञान संस्थानम के लिए सरकार ने नौ एकड़ भूमि के अलावा केंद्रीय और हरियाणा के मंत्रियों और भाजपा विधायकों की ओर से करीब चार करोड़ रुपये से अधिक अनुदान राशि भी दी है। ज्ञानानंद इस मामले में साफ कह चुके हैं कि उनकी गीता को केडीबी ने स्वयं खरीदा है। नौ एकड़ भूमि के मसले पर उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी सरकार से संस्था के लिये जमीन नहीं मांगी। उन्होंने सरकार को कुरुक्षेत्र में गीता शोध केंद्र बनाने की मांग जरूर की थी। इसके बाद सरकार ने उन्हें जमीन देकर कहा कि उनकी संस्था इस कार्य को आगे बढ़ाए। क्योंकि, यह काम संत-महात्माओं का है।
1987 में मेला ग्राउंड के लिए किसानों की भूमि की गई थी अधिग्रहित
सरकार ने 1987 में मेला ग्राउंड के लिए किसानों की सवा 98 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। इसके बदले में किसानों को एक करोड़ 71 लाख का भुगतान भी किया गया था। इस राशि का भुगतान केडीबी को करना था, लेकिन केडीबी के पास यह भूमि खरीदने के के लिए धन नहीं था। बाद में इस राशि को जुटाने के लिए सरकार ने ग्राम पंचायतों और कई विभागों की ड्यूटी लगाई। तब यह धन पूरे हरियाणा से जुटाया गया था।
कोर्ट ने दिए थे 50 लाख रुपये प्रति एकड़ भूमि का मुआवजा देने के आदेश
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने स्वामी ज्ञानानंद के ट्रस्ट को नौ एकड़ भूमि अलॉट करने के बाद सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी कि संस्था को भूमि कितने दाम पर दी गई है और केडीबी ने इसे कितने में खरीदा था। केडीबी ने इसके जवाब में बताया था कि बोर्ड ने जिस सवा 98 एकड़ भूमि को मेला ग्राउंड के लिए खरीदा था, उसका पहले भुगतान एक करोड़ 71 लाख किया गया था। बाद में किसान कोर्ट पहुंच गए। कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला देते हुए 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने के आदेश जारी किए थे।
50 लाख रुपये की भूमि को पांच लाख में
सरकार ने केडीबी के मेला क्षेत्र में स्थित सवा 98 एकड़ भूमि में से नौ एकड़ बेशकीमती जमीन स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को गीता ज्ञान संस्थान के निर्माण के लिए अलॉट की है। इसके लिए केडीबी ने स्वामी ज्ञानानंद की संस्था से महज पांच लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान लिया है। उस समय इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये थी। केडीबी ने इस जमीन को खुद 50 लाख रुपये प्रति एकड़ में खरीदा था।
सरकार ने जिस मकसद से जमीन ली उसे ही ब्रेक कर दिया
कुरुक्षेत्र में लगने वाले विश्वविख्यात सूर्यग्रहण मेला और हर साल लगने वाले गीता जयंती महोत्सव के अतिरिक्त सालभर में अनेक तरह की धार्मिक गतिविधियां होती हैं। लिहाजा करीब तीन दशक पहले सरकार ने भविष्य में कुरुक्षेत्र के बढ़ते महत्व और यहां आने वाले यात्रियों की व्यवस्था को ध्यान में रखते मेला ग्राउंड के लिए किसानों की करीब 100 एकड़ ऊपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया था। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर के मुताबिक स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को मेला ग्राउंड की भूमि में से नौ एकड़ भूमि अलाट करके सरकार उस उद्देश्य को कानून बदल नहीं सकती।
राज्यपाल के 2006 के फैसले को किया अनदेखा
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल की अध्यक्षता में 31 अगस्त 2006 को हुई एक अहम बैठक में प्रस्ताव पारित कर अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि भविष्य में किसी भी संस्था को मेला क्षेत्र में भूमि अलाट न की जाए। इस बैठक में पारित किए गए इस फैसले के बाद अधिकारियों को संज्ञान में लाने की कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को पहले छह एकड़ और इसके अगले साल तीन एकड़ भूमि अलॉट कर दी गई।
जिस भूमि को नियम ताक पर अलाट किया गया, वहां राष्ट्रपति करेंगे शिलान्यास
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर का कहना है कि यह अचंभे वाली बात है कि जिस जमीन को एक प्रदेश के राज्यपाल के आदेशों को दरकिनार करके अलॉट किया गया, उस भूमि पर स्थापित जा रहे गीता शोध केंद्र और गीता ग्रंथालय का शिलान्यास राष्ट्रपति करेंगे। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने किसानों को उनकी उपजाऊभूमि से इसलिए वंचित किया था कि उस जमीन को एक धर्मगुरु की संस्था को कौड़ियों के भाव सौंप दिया जाए।
40 हजार की एक गीता, केडीबी ने खरीदी 12 प्रतियां
केडीबी ने वीवीआई को देने के लिये स्वामी ज्ञानानंद की गीता 600 रुपये प्रति पुस्तक के हिसाब से खरीदी है। वहीं, 12 गीता ऐसी भी खरीदी गई हैं, जिनका प्रति पुस्तक मूल्य करीब 40 हजार रुपये है। इसकी पुष्टि केडीबी के एक अधिकारी ने की है। उनका कहना है कि पहले यह दो गीता खरीदी गई थीं। अब इसकी 10 प्रतियां और खरीदी गई हैं। इनमें से एक गीता को केडीबी की फोटो गैलरी में एलसीडी के आगे रखा गया है। श्रीनिवास फाइन आर्ट की यह गीता केडीबी में डिस्पले की गई है। इसके एक पन्ने पर प्रमुखता से स्वामी ज्ञानानंद महाराज का कट आउट और संदेश है।
सैलजा बोलीं, सदन में उठाएंगी भूमि आवंटन का मुद्दा
शुक्रवार को कुरुक्षेत्र पहुंची राज्यसभा सदस्य कुमारी सैलजा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वह इस मामले को सदन में उठाएंगी। किसानों की भूमि का सरकार ने मेला ग्राउंड के लिए अधिग्रहण किया था। हरियाणा में उनकी सरकार के दौरान राज्यपाल ने 2006 में किसी भी संस्था को जमीन न देने का नियम पारित किया था। इसके बावजूद मौजूदा सरकार का एक संस्था को नौ एकड़ भूमि देना गलत कदम है। उन्होंने कहा कि यह सरकार इवेंट मैनेजमेंट की सरकार है। धरातल पर कुछ नहीं है। भाजपा सरकार में हो रहे तमाम भ्रष्टाचार की जांच समय आने पर कराई जाएगी।