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जिला के 76 गांवों पर बाढ़ का खतरा, जिला प्रशासन अलर्ट

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र। बारिश के इस सीजन में जिला के 76 गांवों के 4251 हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ आने का खतरा मंडरा सकता है, जिसके चलते इन गांवों के लोगों को सतर्क रहना होगा। इनमें से 40 गांवों में अधिक खतरा माना जा रहा है तो वहीं 24 गांव ऐसे भी हैं जो बाढ़ की आशंका के चलते बेहद संवेदनशील के तौर पर चिन्हित किए गए हैं। जहां इन गांवों के लोगों को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है तो वहीं सिंचाई विभाग से लेकर जिला प्रशासन ने भी इन सभी गांवों पर नजरें गढ़ा ली हैं। हालांकि इनमें थानेसर, इस्माईलाबाद, पिहोवा व शाहाबाद खंड के गांव शामिल है लेकिन सबसे अधिक गांव शाहाबाद खंड के हैं जो मारकंडा नदी के आसपास के क्षेत्र में स्थित हैं। प्रशासन ने इन सभी गांवों को न केवल सूचीबद्ध कर लिया है बल्कि बाढ़ के हालात से निपटने के लिए भी तैयारियां जोरों से की जा रही है। संबंधित अधिकारियों की मानें तो जिला में बाढ़ के हालात कभी कभार ही विशेष प्रस्थिति में बनते है लेकिन एहतियात के तौर पर बारिश से सीजन से पहले सभी उचित प्रबंध किए जाने आवश्यक होते है।
वर्ष 2010 में आई बाढ़ का कहर लोग अभी तक नहीं भूले है तो वहीं उस दौरान जिला प्रशासन की ओर रही भारी चूक भी सामने आई थी जिससे प्रशासन को किरकिरी भी झेलनी पड़ी थी। ऐसे में इस बार भी विशेष रूप से एसवाईएल, भाखड़ा नहर व मारकंडा नदी कहर न बरपा दें, इससे पहले प्रशासन पुख्ता प्रबंधों के साथ अलर्ट होने के दावे कर रहा है लेकिन इन दावों की हवा नहरों के टूटे तटबंध और घास से अटे किनारे निकाल रहे हैं।
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एसवाईएल जर्जर अवस्था में, बरपा सकती है कहर
सिंचाई विभाग ने बारिश से सीजन में बाढ़ जैसी आपदा से पहले ही हर वर्ष की तरह इस बार भी पुख्ता प्रबंधों पर भले ही करीब 60 लाख रुपये बहा दिए हों लेकिन एसवाईएल नहर के हालात को देख नहीं लगता कि प्रशासन के दावे कहीं टिक रहे हैं। जहां नहर के अनेकों जगहों से किनारे टूटे पड़े है और उन्हें भरने और पक्का किए जाने तक की जहमत नहीं उठाई है वहीं इसकी सफाई की सुध भी अभी तक नहीं ली जा सकी है। सिंचाई विभाग के कार्यालय के सामने ही नहर जर्जर हालत में हैं जो गंदगी व कबाड़ से अटी हुई है। समय रहते यह सफाई नहीं की जा सकी तो बाढ़ का खतरा अवश्य ही बन जाएगा।


डीसी व अन्य अधिकारी कर चुके हैं दौरा, फिर भी नहीं बदले हालात
डीसी से लेकर आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी डीआरओ डॉ चांदी राम सहित सिंचाई विभाग के अधिकारी भी सभी नहरों का दौरा कर चुके है। इस दौरान पुख्ता प्रबंध किए जाने के आदेश भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद नहर के कटे किनारे तक पाटे नहीं जा सके हैं। लोगों की मानें तो प्रशासन ने वर्ष 2010 में बाढ़ के कहर से भी सबक नहीं लिया है। उस समय ज्योतिसर के समीप नहर टूट जाने से बड़ा नुकसान हुआ था और सेना को मोर्चा संभालना पड़ा था।

किए जा रहे पुख्ता प्रबंध, कंट्रोल रूम स्थापित : चांदी राम
बाढ़ राहत एवं आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारी डॉ चांदी राम का कहना है कि बाढ़ के हालात से निपटने के लिए समय से ही पुख्ता प्रबंध शुरू कर दिए हैं। जिला सचिवालय में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया तो सभी अधिकारियों को भी अलर्ट कर दिया है।सभी धर्मशाला, संबंधित क्षेत्र के स्कूल व सरायों को भी जरूरत पड़ने पर व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने के लिए सूचित किया जा चुका है।
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ये हैं खंड अनुसार बाढ़ को लेकर अधिक संवेदनशील गांव
खंड--अधिक संवेदनशील गांव
थानेसर----- दबखेड़ी, टकोरन, बीबीपुर, मुर्ताजपुर, इंदबड़ी, ज्योतिसर व गढ़ी रोडान।
शाहाबाद----- रामनगर, शाहाबाद, गुमटी, रोहटी, नलवी, मलिकपुर, झांसा, ठसकामीरांजी, बबकपुर, रूपनगर व दयाल नगर।
पिहोवा एवं इस्माईलाबाद----- समस्पुर, लोटनी, खंजरपुर, जलबेहड़ा, नैसी व टबरा।


खंड--कम संवेदनशील गांव
थानेसर----- गुलाबगढ़, सुरमी, मुंडा खेड़ा, चनालहेड़ी, किरमिच।
शाहाबाद----- ठोल, तांगो, माजरी, तंगोरी, नूरपुर, बच।
पिहोवा एवं इस्माईलाबाद----- गंगहेड़ी, जखवाला, हरिगढ़ भौरख, अढोन, कराह साहब।


30 जून तक पूरी होगी नहरों की सफाई , सेना से भी संपर्क : चोपड़ा
सिंचाई विभाग के एक्सईएन आर के चोपड़ा का कहना है कि बाढ़ संभावना को लेकर 30 जून तक सभी प्रबंध पूरे करने हैं और इस तिथि तक नहरों की सफाई भी पूरी कर ली जाएगी। कई टीमें नहरों की सफाई के लिए लगाई गई है और उनके साथ-साथ पूरा प्रशासन बेहद गंभीर है। सेना से भी वे लगातार संपर्क में है और संवेदनशील गांवों की सूची के साथ-साथ पूरे सभी नहरों के हालात से भी अवगत कराया गया है। एक सप्ताह तक कैप्टन हरप्रीत सैनी सहित सेना के अधिकारी व जवान यहां मुआयना भी कर सकते हैं।
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