हड़ताल से घट रही अस्पताल में मरीजों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से जिला अस्पताल में चिकित्सकों व स्टाफ नर्स की किल्लत के चलते सिर्फ गंभीर अवस्था में ही मरीजों को उपचार के लिए दाखिल किया जा रहा है। जबकि सामान्य मरीजों ने अब सिविल अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार न मिलने पर निजी अस्पतालों की ओर रूख करना शुरू कर दिया है, जहां उनकी मजबूरी का निजी चिकित्सक भी भरपूर फायदा उठा रहे है।
विभागीय जानकारी के अनुसार अस्पताल के गायनी विभाग में औसतन 200 जच्चा-बच्चा दाखिल रहते थे। जब से एनएचएम कर्मियों हड़ताल शुरू हुई उसी दिन से यहां मरीजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। इन दिनों जच्चा-बच्चा की संख्या घटकर 52 तक रह गई है। विशेषज्ञों की माने तो सिविल अस्पताल में एंबुलेंस की किल्लत के चलते गर्भवती महिलाएं कम पहुंच रही है। निजी एंबुलेंस चालक मरीज एलएनजेपी अस्पताल लाने की बजाय निजी अस्पतालों में ले जा रहे हैं। ऐसे हालात में एनएचएम कर्मियों ने भी सरकार के प्रति कड़ा रूख अपना लिया है। मंगलवार से कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति ओर भी गंभीर होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
राज्य सह सचिव कुलविंदर कौर ने कहा कि कर्मचारी मजबूर होकर लंबित पड़ी मांगों को लेकर पिछले 15 दिनों से हड़ताल कर रहे है, लेकिन सरकार कर्मियों की मांगें मानने के बजाय अड़ियल रवैए पर अड़ी हुई है। हड़ताल की वजह से मरीजों एवं कर्मचारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती तब तक कर्मचारी हड़ताल पर बैठे रहेंगे।
उपसिविल सर्जन डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि विभाग के आदेशानुसार बुधवार को हड़ताल कर रहे कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है। विभाग द्वारा एंबुलेंस के लिए आउटसोर्सिंग पर लगे चालकों को तैनात किया गया है। यदि जरूरत पड़ती है तो निजी एंबुलेंस का प्रबंध किया जाता है। प्रशासन द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि सिविल अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों को कोई परेशानी न हो।