अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। मॉरिशस के कार्यवाहक राष्ट्रपति परम शिवम पिल्लै ने कहा है कि महाभारत की भूमि में भगवान कृष्ण ने पांच हजार वर्ष पहले जब दुनिया को गीता का संदेश दिया था। श्रीमद्भागवत गीता उस समय भी प्रासंगिक था और आज उससे भी अधिक प्रासंगिक है। वर्तमान विश्व व समाज की सभी समस्याओं का हल श्रीमद्भागवत में निहित है। इस ग्रंथ को जीवन में अपनाकर ही विश्व का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत व्यक्ति को जीवन में सही निर्णय लेने में मदद करती है। जब व्यक्ति के निर्णय सही होते है तो तभी परिणाम भी सही मिलते हैं। आज दुनिया में जिस तरह से मूल्यों का क्षरण हुआ है, ऐसे समय में पूरी मानवता को मजबूत व सशक्त बनाने के लिए विश्व के प्रत्येक व्यक्ति के लिए गीता का अध्ययन जरूरी है। वे गुरुवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ओडिटोरियम हॉल में नव भारत के निर्माण में श्रीमद्भागवत की अंतर्दृष्टि विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व मॉरिशस के कार्यवाहक राष्ट्रपति परम शिवम पिल्लै, हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चूड़ास्मा, हरियाणा के शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा, स्वामी ज्ञानानंद, विधायक सुभाष सुधा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया व कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से तैयार की गई 48 कोस एक सांस्कृतिक यात्रा कॉफी टेबल, संगोष्ठी के सॉविनियर व पुस्तक का विमोचन किया गया। मॉरिशस राष्ट्रपति ने कहा कि अपनी संस्कृति को जिंदा रखने व नई पीढ़ी तक संस्कृति व उसके दर्शन को पहुंचाने के लिए इस तरह के महोत्सव आयोजित करने की आवश्यकता है। इस महोत्सव के आयोजन के लिए उन्होंने राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य व हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बधाई दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने सभी देशवासियों को गीता जयंती की बधाई देेते हुए कहा कि गीता के उपदेश से ही विश्व कल्याण व नव भारत का निर्माण संभव है। भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि में अपनी दिव्य वाणी से दुनिया को यह संदेश दिया था।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह हरियाणा प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि लगातार तीसरे वर्ष गीता जयंती महोत्सव का आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में इस वर्ष मॉरिशस सहयोगी देश व गुजरात सहयोगी राज्य के रूप में शामिल हुए हैं। गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेन्ंद्र सिंह चूड़ास्मा ने कहा कि गीता आधुनिक जीवन का दर्शन है। यह ग्रन्थ भारतीय जीवन व संस्कृति का आधार है। शिक्षा मंत्री प्रोफेसर रामबिलास शर्मा ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन व गौरवशाली संस्कृति है। श्रीमद्भागवत गीता भारतीय जीवन दर्शन का आधार है। इस अवसर पर राज्यमंभी मंत्री कृष्ण बेदी, केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा,थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी, कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना, सेमिनार की निदेशिका प्रोफेसर मंजूला चौधरी, जिला परिषद के अध्यक्ष गुरुदयाल सुनेहड़ी, भाजपा के जिला अध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, डीन, डॉयरेक्टर, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, विद्यार्थी व विभिन्न देशों से आए विद्वान मौजूद थे।
केयू में बनेगा गीता अध्ययन शोध केंद्र, राज्यपाल से मिली अनुमति : डॉ. कैलाश
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने घोषणा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में श्रीमद्भागवत गीता पर अध्ययन के लिए गीता अध्ययन एवं शोध केंद्र स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग की तरफ से एक प्रस्ताव विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को भेजा गया था।
इन्होंने किए व्याख्यान प्रस्तुत
सेमिनार में कार्यक्रम की निदेशिका प्रोफेसर मंजूला चौधरी, प्रोफेसर एससी बागड़ी, अमेरिका से आई सत्या कालड़ा, डॉ. शालिनी सिंह, किर्गीस्तान से महालियो नजरोवा, डॉ. संत कुमार, डा. सचिन बंसल, प्रोफेसर एसी कुंडू, प्रोफेसर हरभजन बंसल ने अपने विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किए। एक अन्य तकनीकी सत्र को कामर्स विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर नीलम डांढा, डा. महाबीर नरवाल व डीन कामर्स प्रोफेसर नरेंद्र सिंह के सहयोग से आयोजित किया गया। इस सत्र में विवेक शंकर नटराजन, प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद, प्रोफेसर योगेंद्र सिंह वर्मा, प्रोफेसर दिलीप सिंह, प्रोफेसर आरएस अरोड़ा, प्रोफेसर केपी कोशिक, प्रोफेसर एमबी शुक्ला, प्रोफेसर राजकुमार ने अपने व्याख्यान दिए व बड़ी संख्या में शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।