आईसीआईसीआई प्रबंधन ने शिकायतकर्ता को बताया बैंक का कर्जदार
- प्रवक्ता ने कहा, शिकायतकर्ता ने बैंक को बदनाम करने की रची साजिश
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर, पिपली शाखा प्रबंधक सहित अन्य आठ लोगों पर धोखाधड़ी व कंपनी की साख को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज होने के बाद अब बैंक प्रबंधन भी आगे आया है। बैंक प्रवक्ता ऋषिता सिंघल ने कहा कि यह शिकायतकर्ता बैंक का कर्जदार है और उन्होंने जानबूझ कर बैैंक को बदनाम करने साजिश रची है।
उन्होंने कहा कि वह समय पर अपनी देनदारियों का भुगतान करने में विफल रहा है। खास तौर पर इस मामले में बैंक के कई लिखित अनुरोधों और बैंक द्वारा बार-बार विजिट करने के बावजूद शिकायतकर्ता अपना ऋण चुकाने में नाकाम साबित रहा। इसलिए बैंक के पास सिक्योरिटी रखी गई वस्तुओं को बैंक ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से बेचा दिया था। यह बैंक के साथ कर्जदार द्वारा हस्ताक्षरित ऋण अनुबंध के अनुरूप है। इसके अतिरिक्त, अपनी देनदारियों को पुनर्प्राप्त करने के बाद बैंक ने अतिरिक्त धनराशि को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से कर्जदार को वापस कर दिया है। उन्होंने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक की मजबूत उधार प्रक्रिया है और उसने सभी दिशानिर्देशों का पालन किया है। इस मामले में बैंक पूरी तरह से पुलिस के साथ सहयोग कर रहा है। गौरतलब है कि इंदोया फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी धीरज गुुप्ता की याचिका पर कोर्ट ने एफआईआर के आदेश दिए थे। जिसके आधार पर पुलिस ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर, सीनियर जरनल मैनेजर एग्रीकल्चर बैंकिंग ए कामिनी, बैंक की पिपली शाखा में कार्यरत राहुल धवन, अंशुमन अरोड़ा, एग्रीकल्चर विंग के ब्रांच मैनेजर सवि जैन, केंद्रीय वेयर हाउस के मैनेजर आरके शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।