अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में संस्कृति बोध परियोजना अखिल भारतीय कार्य गोष्ठी का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। इसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, असम, महाराष्ट्र, विदर्भ, उत्तराखंड, मणिपुर, उड़ीसा, कर्नाटक, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, छत्तीसगढ़ राज्यों से आए 50 क्षेत्र संयोजकों और प्रांत संयोजकों ने भाग लिया। कार्य गोष्ठी को संबोधित करते हुए विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान देशभर के विभिन्न विद्यालयों में पढ़ रहे करीब 19 लाख छात्रों में संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से संस्कारों का उन्नयन कर रहा है।
उन्होंने बताया कि विद्या भारती की आने वाले समय में इस संख्या को बढ़ाने की योजना है। इसके लिए प्रतिभागियों को विद्यालयों में संपर्क कर और सोशल मीडिया आदि का सहारा लेकर विद्यालयों में संपर्क अभियान चलाने के लिए टिप्स दिए जा रहे हैं। डॉ. रामेन्द्र सिंह ने कहा सत्र 2014-15 में 18 लाख 74 हजार 772 छात्रों ने संस्कृति ज्ञान परीक्षा में भाग लिया था। सत्र 2016-17 में यह संख्या 19 लाख 14 हजार 742 हो गई है। कहा कि संस्कृति बोध परियोजना के अंतर्गत तैयार किए जाने वाले साहित्य में ऐसे तथ्यों की जानकारी दी गई है, जिसका सुकृत्यों से संबंध रहा है। भारतीय संस्कृति के विषय में जानकारी प्राप्त करके हमारे बाल-किशोर विद्यार्थी सद्गुणों को अपने व्यक्तित्व के अंग बनाएं। उन्होंने विद्या भारती की संस्कृति बोध परियोजना के अंतर्गत होन वाले अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, आचार्य संस्कृति ज्ञान परीक्षा, प्रश्नमंच प्रतियोगिता (छात्रों एवं आचार्यों के लिए), निबंध लेखन (छात्रों एवं आचार्यों के लिए) की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि संस्थान शिक्षा एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए पुस्तक प्रकाशन भी कर रहा है। इसके अंतर्गत 108 पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। इनमें प्राचीन महान वैज्ञानिकों, गणितज्ञों, महापुरुषों की कथाएं, भारतीय शिक्षा आदि अनेक विषय संकलित हैं। संस्थान का चित्र प्रकाशन भी है। इसमें महान वैज्ञानिकों, शिक्षविदों, ऋषियों आदि के 112 चित्र संकलित किए हैं। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान समाजोपयोगी अन्य कार्य भी कर रहा है। इसके तहत गत वर्ष संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से देशभर में कार्यशालाओं का आयोजन कर आठ लाख विद्यार्थियों को विद्या भारती की संकल्पना के साथ जोड़ा गया है। इस प्रकार अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा और कार्यशाला के आयोजन के माध्यम से कुल 26 लाख 42 हजार 287 विद्यार्थियों और 71 हजार 138 शिक्षकों, प्रशिक्षकों, विषय-विशेषज्ञों से संपर्क हुआ है। उन्होंने बताया कि 13 से 15 अक्तूबर तक चलने वाली कार्यकगोष्ठी में संस्कृति ज्ञान परीक्षा की पुस्तकों में संशोधन और प्रश्नमंच निर्माण का कार्य करने के लिए समूह आधारित बैठकें होंगी।