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दस दिन में बना दिया रोबोट, घर वाले भी हैरान

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
घर में वेस्ट पड़ा मैटीरियल रोबोट को मूर्त रूप दे सकता है, ये हुनर दिखाया है ग्रामीण पृष्ठभूमि के आठवीं कक्षा में अध्ययनरत मितेश शर्मा ने। इस कार्य को करने के लिए मितेश ने गर्मियों की छुट्टियों का सदुपयोग किया। अर्बन एरिया में जहां इन गर्मियों की छुट्टियों में अनेक जगहों पर हाबी क्लासेज जैसी गतिविधियों के माध्यम से अनगिनत बच्चों ने कुछ कुछ बनाना सीखा, वहीं मितेश इन छुट्टियों में घर में बैठकर मिशन रोबोट पर जुटा रहा। मितेश का कहना है कि वह भविष्य में वैज्ञानिक ही बनना चाहता है। जिला के गांव मथाना वासी कमल शर्मा का कहना है कि उनके पुत्र मितेश ने अपने घर में ही खेल-खेल में इस रोबोट तैयार किया है। उन्होंने बताया कि मितेश के बनाए रोबोट को देखकर परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, शिक्षक और गांव वासी भी हैरान हैं। उन्होंने बताया कि मितेश गांव के ही एचसी मेमोरियल स्कूल मथाना में कक्षा 8वीं कक्षा का छात्र है। पिता का कहना है कि वह भी हैरान है कि मितेश के मन में न जाने ऐसा क्या आया कि उसने मात्र दस दिनों में एक रोबोट तैयार कर दिया। मितेश को प्रोत्साहित करने में उसके स्कूल के चेयरमैन संजीव गौड़ की भूमिका बताई गई है।
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सोशल मीडिया पर भेजी
मितेश के परिवार के सदस्यों ने इस रोबोट का वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है। मितेश की माने तो उसने फिल्मस्टार रजनीकांत की मूवी रोबोट देखी थी। इस फिल्म को देखने के बाद उसे भी रोबोट बनाने की धुन सवार हो गई। हालांकि पहले पहल वह ये तय भी नहीं कर पा रहा था कि यह कैसे संभव होगा, लेकिन जब इस मिशन में जुटा तो घर के फालतू सामान का उपयोग रोबोट को मूर्त रुप देकर ही दम लिया।
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घर और बाहर पड़ी फालतू सामग्री को जुटाया
मितेश ने जहां लोहे के कनस्तर, इंजेक्शन सीरिंज, लकड़ी की फट्टियां, आरी ब्लेड, चॉकलेट के डिब्बे, गत्ते, बच्चों की ट्राई साइकिल के टायरों का इस्तेमाल रोबोट को तैयार करने में किया, वहीं बाजार से मिनी एलईडी लाइट, 5.5 वोल्ट की दो मोटर, एक 12 वोल्ट की बैटरी, रिकॉर्डर, स्विच, बिजली की तारों का उपयोग रोबोट बनाने में किया। हालांकि इस रोबोट बनाने में उसका ज्यादा खर्च नहीं हुआ।
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सिर्फ डेढ़ हजार का सामान बाजार से खरीदा
मितेश ने बताया गया है कि उसने बाजार से करीब डेढ़ हजार का ही सामान खरीदा था। उसने कहा कि यह रोबोट मूवमेंट करता है, चलता है, गिलास पकड़ता है। रोबोट बनाने के बाद मितेश को मिल रही सराहना से वह गदगद है। उसका कहना है कि उसका यह पहला प्रयोग है, जिसे वह जीवन भर संभाल कर रखेगा। मितेश की माने तो उसका इरादा वैज्ञानिक बन कर राष्ट्र सेवा करने का है।
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