जिले के 40 गांवों पर बाढ़ का खतरा, प्रशासन अलर्ट
कुरुक्षेत्र। बारिश के सीजन में इस बार जिले के 40 गांवों के लोगों को सतर्क रहना होगा। इन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है, जिनमें से 24 गांव में खतरे की संभावना अधिक मानी जा रही है। इनको लेकर न केवल गांव के लोगों के बेहद सतर्कता बरतने की जरूरत है बल्कि जिला प्रशासन भी इस गांवों पर पूरे सीजन के दौरान नजरें गढ़ाए रहेगा। इसके लिए इन गांवों को सूचीबद्ध कर लिया गया है तो वहीं प्रशासनिक तौर पर ऐसे हालात से निपटने के लिए तैयारियां भी मुकम्मल की जा रही है। इन गांवों में हालांकि जिला के थानेसर, पिहोवा, इस्माईलाबाद व शाहाबाद ब्लॉक के गांव शामिल हैं, जबकि शाहाबाद के इनमें अधिक गांव है और मारंकडा नदी से ही बाढ़ का खतरा अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो जिला में बाढ़ के हालात कभी-कभार ही बनते हैं। इसके बावजूद ऐसे सीजन से पहले ही पुख्ता प्रबंधों को पूरा कर लिया जाता है।
ब्लॉक अनुसार बाढ़ की अधिक संभावना वाले गांव
शाहाबाद : रामनगर, शाहाबाद, गुमटी, मलिकपुर, नलवी, रोहटी, ठसका मीरांजी, झांसा, दयालनगर, बबकपुर व रूपनगर शामिल हैं जबकि इसी ब्लॉक के गांव नूरपुर बच, ठोल, टांगो, तंगौरी व माजरी को बाढ़ की दृष्टि से कम संवेदनशील माना गया है।
थानेसर : दबखेड़ी, टकोरन, बीबीपुर, मुर्तजापुर, इंदबड़ी, ज्योतिसर व गढ़ी रोडान को अधिक संवेदनशील तो वहीं किरमिच, सुरमी, चलानहेड़ी, मुंडा खेड़ा, गुलाब गढ़ को बाढ़ की संभावना के अनुसार कम संवेदनशील गांव सूचीबद्ध किया गया है।
पिहोवा व इस्माईलाबाद : टबरा, नैंसी, जलबेहड़ा, खंजरपुर, लौटनी व समसपुर को अधिक संभावित तो वहीं हरिगढ़ भौरख, अढ़ोन, कराह साहिब, गंगहेड़ी व जखवाला को कम बाढ़ संभावित गांव की श्रेणी में लिया गया है।
कहीं एसवाईएल व भांखड़ा नहर न बरपा दे कहर
धर्मनगरी के साथ-साथ जिले के कई गांवों के साथ होकर गुजरने वाली एसवाईएल व भाखड़ा नहरें कभी भी कहर बरपा सकती हैं। भले ही प्रशासन पुख्ता प्रबंधों के दावे कर रहा हो, लेकिन इन नहरों की हालत देखते ही बाढ़ के खतरे का एहसास होने लगता है। न तो इन नहरों की समुचित सफाई ही की जा सकी है और न ही इनके किनारों की ही आज तक मरम्मत हो सकी है। गंदगी व कबाड़ से अटी इन नहरों के किनारे बेहद नाजुक बने हुए हैं तो वहीं कई जगहों पर दरारें भी आई हुई हैं। जिला उपायुक्त से लेकर प्रशासनिक टीम भी सभी नहरों व नदियों का जिला के क्षेत्र में मुआयना कर चुकी है, लेकिन आज तक भी ये किनारे नहीं पाटे जा सके हैं। इससे अधिकारियों की गंभीरता का खुलासा हो रहा है। बता दें कि वर्ष 2010 में एसवाईएल के किनारे गांव ज्योतिसर के समीप बह जाने से धर्मनगरी में ही बाढ़ ने जमकर कहर ढाया था। इससे भी प्रशासन सही सबक नहीं ले सका है।
सेना को भेजी बाढ़ संभावित गांवों की सूची : रमनजीत कौर
जिला प्रशासन ने जिले के बाढ़ संभावित व कम संभावना वाले गांवों, नहर और नदियों की पूरी जानकारी से सेना को भी अवगत करवाया गया है तो वहीं जेसीबी, क्रेन सहित ऐसे मौके में काम आने वाले अन्य सामान को लेकर भी संबंधित लोगों से संपर्क स्थापित कर लिया गया है।
बनाई गईं टीमें, सभी विभाग किए गए अलर्ट : चांदी राम
बाढ़ राहत एवं आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी व जिला राजस्व अधिकारी चांदी राम का कहना है कि जिला प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध करने शुरू कर दिए हैं। जहां स्वास्थ्य से लेकर पंचायती विभाग व अन्य सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है वहीं जिला सचिवालय में बाढ़ नियंत्रण कक्षा भी स्थापित कर दिया है। इसके लिए टोल फ्री नंबर भी जारी कर दिया गया है। इसके अलावा सिंचाई विभाग की ओर से भी जलबेहड़ा, शाहाबाद, बुढ़ेड़ा व ज्योतिसर में भी कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं। धर्मशालाओं व सरायों व सभी संबंधित एरिया में स्थित राजकीय व गैर राजकीय स्कूल प्रशासन को भी पत्र जारी कर जरूरत पड़ने पर व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिला उपायुक्त व अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर सभी नहरों व नदियों का मुआयना भी किया जा चुका है और जहां भी खामियां मिली थीं, उन्हें दुरुस्त करने के संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश भी दिए गए हैं। जल्द ही एक बार फिर इन नहरों का मुआयना किया जाएगा।