उपायुक्त डॉ. जे गणेसन ने बताया कि जिले में अब कोई भी दूध विक्रेता मिलावटी दूध नहीं बेच पाएगा। जिला प्रशासन द्वारा शीघ्र ही सभी खंड मुख्यालयों स्थित राजकीय पशु चिकित्सालयों में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना के तहत मिल्क एनालाइजर और मिल्क एडल्ट्रेशन किट स्थापित की जाएगी। इन उपकरणों से कोई भी व्यक्ति दूध में किसी भी प्रकार की मिलावट की जांच करवा सकेगा।
उपायुक्त ने बताया कि मिल्क एनालाइजर और मिल्क एडल्ट्रेशन किट की खरीद पर करीब तीन लाख रुपया खर्च होगा। सभी सातों खंड मुख्यालयों पर ये उपकरण उपलब्ध रहेंगे। एक मिल्क एनालाइजर की कीमत 40 हजार रुपये और मिल्क एडल्ट्रेशन किट की कीमत ढाई हजार से तीन हजार रुपये तक है। ये दोनों उपकरण पशुपालन विभाग के कार्यालय के माध्यम से खरीदे जाएंगे।
मिल्क एनालाइजर एक प्राइवेट कंपनी से और मिल्क एडल्ट्रेशन किट नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से खरीदे जाएंगे। मिल्क एनालाइजर से दूध में फैट, प्रोटीन के साथ-साथ पानी की मिलावट का भी पता लगाया जा सकेगा। मिल्क एडल्ट्रेशन किट द्वारा दूध में यूरिया और अन्य घुलनशील पदार्थों की मिलावट के बारे में जांच की जा सकेगी। जांच का कार्य खंड मुख्यालयों के राजकीय पशु अस्पताल में कार्यरत पशु चिकित्सक और वीएलडीए करेंगे।
पोली क्लीनिक सिरसा में कार्यरत डॉ. भारत भूषण ने बताया कि विभाग द्वारा दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से जिला में सरकार की योजना के तहत मिनरल मिक्सचर, कृत्रिम गर्भाधान और सघन मुर्राहा विकास जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।