- नागरिक अस्पताल में भर्ती मरीजों को चार प्राणायाम व 14 आसनों का रोजाना करवाया जा रहा अभ्यास
टीबी मरीजों को ठीक करने के लिए डॉक्टरों ले रहे योग का सहारा
अनुज शर्मा
करनाल। जिले में टीबी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। रोजाना नागरिक अस्पताल की ओपीडी में 80 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसके अलावा अस्पताल के आईपीडी ब्लॉक में 10-12 मरीज भर्ती रहते हैं। इन मरीजों के इलाज में अब योग का भी सहारा लिया जा रहा है। इन टीबी मरीजों को डॉक्टर योग का अभ्यास कराने में जुटे हैं। ताकि मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकें और वे जल्द ठीक हो सकें।
टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि नागरिक अस्पताल की ओपीडी सहित आईपीडी ब्लॉक में दाखिल मरीजों को टीबी से निजात दिलाने के लिए योग का सहारा लिया जा रहा है। जिसमें वे आयुष विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल में नियुक्त योग सहायक का सहारा ले रहे हैं। योग सहायक एक घंटे रोजाना आईपीडी ब्लॉक में दाखिल मरीजों को प्राणायाम सहित विभिन्न प्रकार के आसनों का अभ्यास करवा रही हैं। उन्होंने बताया कि टीबी की बीमारी कई प्रकार की दवाइयों के दुष्प्रभाव, शुगर, किडनी की दिक्कत, कैंसर, कुपोषण व टीबी मरीज से संक्रमण से होती है। वहीं, इनके लक्षणों में कई हफ्तों तक खांसी, रात में पसीना आना, बुखार रहना, थकावट होना, वजन घटना, सांस लेने में दिक्कत, भूख न लगना व ठंड लगना शामिल है। संवाद
टीबी में ये प्राणायाम व आसन उपयोगी
योग सहायक रीटा शर्मा ने बताया कि मरीजों में टीबी को ठीक करने के लिए सबसे अधिक अनुलोम-विलोम, कपालभाती, भ्रामरी, भस्त्रिका चार प्राणायाम उपयोगी हैं। वहीं, आसनों में उष्ट्रासन, सर्पासन, सेतुबंधासन, मत्स्यासन, गोमुख आसन, मर्जरियासन, भुजंगासन, धनुरासन, अर्ध-चंद्रासन, ताड़ासन, मकरासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन व उत्तानपादासन 14 आसन उपयोगी हैं। जिन्हें मरीजों को रोजाना अभ्यास करवाया जा रहा है। इन सभी प्राणायाम व आसनों से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है और जिससे उनका शरीर टीबी के खिलाफ अपने आप ही लड़ने सक्षम हो जाता है।
कब कितने मरीज मिले और ठीक हुए
वर्ष केस ठीक प्रतिशत
2019 3710 2756 89
2020 4013 3210 87
2021 3658 3458 87
2022 4376 3314 89
2023 3171 3842 91
वर्ष 2023 में आयुष विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल में योग सहायक लगाया है। जिसके बाद से कई विभागों के साथ टीबी विभाग के मरीजों को रोजाना योग करवाया जा रहा है। जिसका लाभ मरीजों को मिल रहा है। योग के कारण पिछले चार सालों में पहली बार जिले का सफलता दर 90 प्रतिशत पार किया है।
- डॉ. सिम्मी कपूर, उप-सिविल सर्जन, करनाल