संवाद न्यूज एजेंसी
इंद्री। आंखों से दिव्यांग होने के बावजूद यश्विन संगीत की दुनिया में पहचान बना चुके हैं। वह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संगीत में एमए कर रहे हैं। उन्होंने संगीत की धुन को कभी थमने नहीं दिया। यश्विन ने इंद्री के पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 10वीं और 12वीं करने के बाद जिला स्तर की स्कूल संगीत प्रतियोगिताओं में कई बार प्रथम स्थान हासिल किया। वर्ष 2018 में जींद के एकलव्य स्टेडियम में आयोजित संगीत की राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में 22 जिलों की टीमें शामिल थी। इसमें यश्विन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। यश्विन के पिता पीएमश्री स्कूल में सहायक के तौर पर सेवा दे रहे हैं जबकि मां भी स्कूल से मिड-डे-मील वर्कर हैं। यश्विन ने वर्ष 2018-19-20 के दौरान जिला स्तर पर आयोजित कई संगीत प्रतियोगिताओं में भाग लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
संगीत यात्रा की शुरुआत-
यश्विन ने बताया कि नौवीं में पढ़ाई के दौरान स्कूल के एक अध्यापक महिंदर खेड़ा ढोलक लेकर आए थे। ढोलक की आवाज पर उनके पांव अपने आप थिरकने लगे। ऐसा लगा मानो संगीत उन्हें बुला रहा हो। अध्यापक महिंद्र की प्रेरणा से ढोलक सीखने की शुरुआत की। फिर स्कूल के ही अन्य अध्यापक संजीव से ढोलक व तबला सीखा। कुछ समय बाद हारमोनियम में भी महारत हासिल कर ली। यश्विन की यह प्रेरक यात्रा दिव्यांगजनों के लिए संदेश देती है कि इरादे मजबूत हों तो कोई बाधा रोकर नहीं रख सकती। यश्विन ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। सामान्य बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई करना, कभी भी आसान नहीं रहा। पढ़ने के लिए ब्रेल लिपि वाली किताबें नहीं थी। सुनकर समझना होता था। परीक्षा के समय छोटी कक्षा के विद्यार्थी की मदद लेनी पड़ती थी। वह उनसे प्रश्न का उत्तर बोलकर बताता था और लिखता था। अध्यापक महिंद्र का बहुत साथ मिला। उनकी सफलता उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है।
अभिभावक बोले- यश्विन की लगन से चिंता खत्म
अध्यापक महिंदर ने बताया कि यश्विन के अभिभावक उसके आंखों से दिव्यांग होने के कारण उसके भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे। उनसे बातचीत के बाद उन्होंने यश्विन को पढ़ाने का निर्णय लिया। यश्विन काफी होशियार था। अपनी मेहनत से उसने न सिर्फ दिव्यांग अपितु सामान्य बच्चों के लिए भी एक मिसाल कायम की है। यश्विन के अभिभावकों ने बताया कि वह यश्विन को लेकर हमेशा परेशान रहते थे लेकिन यश्विन की मेहनत और लगन को देखकर आज वह बेफिक्र हैं।