संवाद न्यूज एजेंसी
इंद्री। यमुना नदी का पानी तो कम हो गया, लेकिन यह तबाही के निशान छोड़ गया है। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। जगह-जगह भूमि का कटाव हो गया। बाढ़ के बाद फैली गंदगी से अब बीमारियां फैलने की संभावना है।
किसान राम सिंह, नरेश, ओम सिंह और रामेश्वर का कहना है कि क्षेत्र के कलसौरा, चंद्राव, चौगांवा, गढ़पुर टापू, नगली और डबकौली खुर्द गांव के खेतों को यमुना नदी में आए पानी ने आगोश में ले लिया था। अब धीरे-धीरे पानी खेतों से उतर रहा है। हालांकि कुछ खेतों में अभी भी पानी है। परंतु जिन खेतों से पानी उतर चुका है, उनमें खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। सब्जियों की फसल भी नष्ट हो गई। हमारी प्रशासन से मांग है कि जल्द खराब हुई फसलों का जायजा लेकर किसानों को मुआवजा दिया जाए।
कर्ज के बोझ तले दबेंगे किसान
किसानों का कहना है कि हालात सुधरने में काफी समय लगेगा। जिन किसानों की फसल बर्बाद हो चुकी हैं, वे कर्ज में दब जाएंगे। छोटी जोत वाले किसानों को परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा। जो किसान सिर्फ खेती पर निर्भर थे, उन्हें ज्यादा दिक्कत होगी। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में बीमारियां फैलने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। आमतौर पर बाढ़ के बाद बीमारियां दस्तक देती हैं, इसलिए स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि बाढ़ ग्रसित क्षेत्रों में डॉक्टरों की टीम समय पर भेजे।
नौ एकड़ धान, गन्ने की फसल खराब
किसान ध्यानी सिंह का कहना है कि उसकी नौ एकड़ धान व गन्ने की फसल थी। सारी खराब हो गई। पानी से गढ़पुर टापू का पुल भी पूरी तरह डूब चुका था। हालांकि अब पानी सामान्य है, लेकिन पुल के ऊपर कीचड़ जमा है। जिस कारण खेतों में जाने वाले किसानों को पुल से गुजरने में काफी परेशानी हो रही है।
यमुना नदी में अब केवल साढ़े 13 हजार क्यूसिक पानी है। हालात सामान्य हैं। अब और पानी आने की संभावना नहीं है। अब स्थिति पहले से बेहतर है। प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
- आशीष कौशिक, एसडीओ सिंचाई विभाग