125.... इंद्री पानी के साथ आई रेत से उत्पन्न धंसन में ट्रैक्टर ही फंस गए है। संवाद
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इंद्री। यमुना नदी में आई बाढ़ के बाद बेशक यमुना नदी का जलस्तर कम हो गया हो लेकिन किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। बाढ़ के पानी ने फसलें तबाह कर दी, उनके कृषि यंत्र तक पानी में बह गए। रही सही कसर अब भूमि कटाव ने पूरी कर दी। अब खेतों और उनके लिए जाने वाले रास्तों में दो से तीन फीट तक सिल्ट पड़ी हुई है। किसानों को पैदल निकलने में समस्या तो है ही ट्रैक्टर भी फंस जा रहे हैं। बुधवार को भी एक ट्रैक्टर रास्ते में फंस गया।
गांव नगली के किसान विक्की ने बताया कि 45 एकड़ जमीन में से अब केवल 33 एकड़ ही बची है। 12 एकड़ जमीन पानी साथ ही बहा कर ले गया। जिसका सर्वे करने के लिए चंडीगढ़ और करनाल से सर्वे टीम आई थी। क्षेत्र के किसान कंवर पाल, शेरसिंह, बब्बू व अंकित का कहना है कि पानी ने गन्ने की फसल खराब कर दी। पॉपुलर के पेड़ जड़ से उखड़ गए। धान के खेतों में रेत बिछी है। किसान ट्रैक्टर लेकर खेत तक जाने की कोशिश करते हैं तो पानी के साथ आई रेत से उत्पन्न सिल्ट में ट्रैक्टर ही फंस जा रहे हैं।
किसान मनजीत ने बताया कि उनके पास खेत जोतने के लिए अपना ट्रैक्टर नहीं है। किराए पर संसाधन लेकर फसल बोई थी लेकिन बाढ़ ने सब खत्म कर दिया। ठेके पर जमीन लेकर बुआई कर रहे किसानों की दशा और भी खराब है। इससे किसान हताश हैं कि ठेके पर ली गई जमीन की की रकम कैसे चुका पाएंगे।