गंगा सहित प्रदूषित हो रही पवित्र नदियों के संरक्षण के लिए दिल्ली में प्रदर्शन, सभी तीर्थों को रेल मार्ग से जोड़ने, तीर्थ पर्यटन विकास निगम की स्थापना, ब्राह्मण समाज को आरक्षण देने की मांग जैसे नौ प्रस्ताव अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के 41वें राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित किए गए।
वहीं इस मौके पर दिसंबर 2012 में सोमनाथजी (गुजरात) में हुई बैठक की कार्रवाई की भी पुष्टि की गई। दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम सत्र में देशभर के तीर्थों, तीर्थ पुरोहितों को तीर्थ यात्रियों के मुद्दों पर चिंतन हुआ। अधिवेशन के अंतिम सत्र की अध्यक्षता महासभा के अध्यक्ष श्रीप्रकाश मिश्रा ने की और महामंत्री नवीन नागर चतुर्वेदी ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
बैठक में 32 तीर्थों से आए प्रतिनिधियों के सुझाव लेने के उपरांत मुख्य रूप से नौ प्रस्तावों पर मिश्रा ने कहा कि इन्हें अमलीजामा पहनाने की कार्रवाई जल्द होगी, जबकि गंगा, यमुना और सरस्वती सहित प्रदूषित हो रही पवित्र नदियों के संरक्षण के लिए फरवरी 2014 में व्यापक आंदोलन की शुरुआत दिल्ली में धरना-प्रदर्शन से होगा।
मुख्य रूप केदारनाथ त्रासदी के संदर्भ में विचार आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केदारनाथ जी और पुरोहितों को विशेष सुविधा प्रदान करने की मांग की गई।
महासभा के संरक्षक डॉ.सत्यदेव, केके कौशिक, विश्वनाथ तिवारी, महामंत्री राजेंद्र जोशी एवं कोषाध्यक्ष रामकुमार गौतम तथा अन्य पदाधिकारियों ने सभी प्रतिनिधियों को स्मृति चिह्न के रूप में कुरुक्षेत्र का प्रतीक चिह्न श्रीकृष्ण-अर्जुन रथ, टेलीफोन विवरणिका, मेडल, गमछा भेंट किया गया। इसके उपरांत तीनों बसों में सभी प्रतिनिधियों को कुरुक्षेत्र भ्रमण कराया गया। जून 2014 में अगला राष्ट्रीय अधिवेशन रामेश्वरम में होगा।
32 तीर्थों के ये पुरोहित जुटे
इलाहाबाद से रामकिशन तिवारी, श्यामजी मिश्र, अयोध्या से नंद कुमार मिश्र, पुष्कर से श्रवण कुमार पाराशर, बैजनाथ धाम से डॉ.सुरेश भारद्वाज, दुर्लभ मिश्र, नन्नू भाई मिश्र, रामेश्वरम से रविंद्र दशपुत्रे पंडा, नासिक से सतीश शुक्ला, कांचीपुरम से मुरलीधर शास्त्री, हरिद्वार से श्रीकांत वशिष्ठ, सुरेंद्र सिखौला, फल्गु तीर्थ से पुरुषोत्तम शर्मा, पिहोवा से गोपाल कौशिक, अश्विनी जोशी, मथुरा से नवीन नागर, राजेश मिश्रा, राकेश तिवारी एडवोकेट, वृंदावन रमेश चंद्र गौतम, दाऊजी से राज कुमार टेहरिया, केदारनाथ जी उत्तराखंड से बगवाड़ी, सोमनाथ जी (गुजरात)से जगदीश भाई, मिश्रित तीर्थ से प्रेमप्रकाश मिश्रा, ज्वालाजी से अनिल शर्मा, नैना देवी से अनिल शर्मा एडवोकेट सहित 32 तीर्थों के पुरोहित उपस्थित रहे।