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मातृभाषा में सरलता से होता है कार्य : डॉ. सिंह

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। हमें अपनी राष्ट्रभाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रचार प्रसार करना पड़ता है। मैने यूरोप दौरे के दौरान देखा कि जर्मनी, फ्रांस आदि देशों में जो सूचना पट्ट आदि लगे थे, वो सभी वहां की ही भाषाओं में ही थे। मातृभाषा में सरलता से कार्य करने में कम दबाव की स्थिति उत्पन्न होती है। ये बात शुक्रवार को राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने कही।
वे नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास)) करनाल की 80वीं छमाही बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। समिति की बैठक में केंद्र सरकार के कार्यालयों, उपक्रमों, अनुसंधान संस्थानों, निगमों एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों आदि में राजभाषा हिंदी के प्रचार, प्रसार एवं कार्यान्वयन के क्षेत्र में किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। साथ ही अगली छमाही की कार्य-योजना पर चर्चा की गई।
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डॉ. धीर सिंह ने कहा कि हमें भी यूरोपीय और अन्य पाश्चात्य देशों की भांति ही अपनी राजभाषा, राष्ट्रभाषा एवं मातृभाषाओं पर गर्व होना चाहिए। कंप्यूटर एक सशक्त माध्यम है, जिसकी सहायता से हिंदी में कार्य करने की आवश्यकता है, तभी हिंदी का कार्यालयों में और अधिक प्रयोग बढ़ेगा।
उन्होंने राजभाषा नीति के तहत हिंदी को प्रेरणा, प्रोत्साहन, प्रशिक्षण, प्रबंधन और पुरस्कार के माध्यम से आगे बढ़ाने की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, राजभाषा विभाग, नई दिल्ली के उप निदेशक (कार्यान्वयन) डॉ कुमार पाल शर्मा ने हिंदी के नियमों और अधिनियम की ओर ध्यानाकर्षण किया।
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उन्होंने कंप्यूटर के प्रयोग से हिंदी को और अधिक सरलता से आगे बढ़ाने पर बल दिया। बेहतर कार्य करने वाले कार्यालयों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। साथ ही हिंदी कार्य की गतिविधियों और कंप्यूटर पर हिंदी कार्य को बढ़ाने की योजना तैयार की गई। बैठक का संचालन नराकास के सदस्य सचिव एवं संयुक्त निदेशक (राजभाषा) धीरज शर्मा ने किया। समंवयक, संयुक्त निदेशक (प्रशासन) एवं कुलसचिव बीडी फंसल ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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