- पश्मीना बाजार की सबसे महंगी शॉल होने पर भी बढ़ रही मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ठिठुरन भरी सर्दी शुरू होते ही बाजार में ऊनी कपड़ों की खरीदारी में शॉल के साथ-साथ मफलर और दस्तानों को भी खरीदा जा रहा है। ठंड में शॉल न केवल गर्माहट का साधन है, बल्कि इस मौसम में फैशन भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाजार में शॉल की विभिन्न वैरायटी उपलब्ध हैं, जो अपनी बनावट, गुणवत्ता और डिजाइन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में मिल रही हैं। हर वर्ग और बजट के लिए एक विकल्प मौजूद है। वहीं, मफलर युवतियां गले में फैशन के साथ-साथ ठंड से बचने के लिए भी पहन रही हैं। बाजार में नेट और ऊनी फैब्रिक में मफलर हैं और पश्मीना शॉल को काफी पसंद किया जा रहा है।
कर्ण बाजार में शॉल की कई किस्में मिल रही हैं जिनमें पश्मीना शॉल, जो अपनी मुलायम, बनावट व हल्के वजन के लिए मशहूर है। यह शॉल कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कारीगरों के हाथों द्वारा बनाई जाती है। पश्मीना पहाड़ी इलाके में मिलने वाली बकरियों के बाल से बनी ऊन से बनती है। इन बकरियों की ऊन काफी हल्की होती है और गर्म भी। इसकी खासियत है कि यह शॉल एक अंगूठी के अंदर से आसानी से निकल जाती है, जिससे असली पश्मीना शॉल होने का भी पता लगता है। इसकी कीमत बाजार में कम से कम 3,000 रुपये से शुरू होकर 50,000 तक है।
वूलमार्क, ऊनी शॉल जो ठंड से बचाने के लिए सबसे लोकप्रिय है, यह मोटे कपड़े में और गर्म होती है। इसकी कीमत 500 रुपये से शुरू है। वहीं कांथा शॉल, जो पुराने कपड़ों को सिलकर बनाई जाती है। यह पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बनती है। इस शॉल की कीमत 10,000 से शुरू होकर 15,000 तक होती है। बनारसी शॉल, जो रेशम के कपड़े से बनाई जाती है, लोग शादी समारोह, पार्टी में फैशन लुक देने के लिए पहन कर रहे हैं। इसकी कीमत 2,000 से शुरू है। जमावार शॉल जो कश्मीर में बनाई जाती है। यह काफी गर्म शॉल होती है। यह रॉयल्टी स्तर को दर्शाती है। इसकी कीमत 3,000 से शुरू है।
डिजाइनर शॉल युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। इनमें आधुनिक प्रिंट, हल्की कढ़ाई होती है। इसकी कीमत बाजार में 200 रुपए से शुरू है। खादी शॉल जो कि खादी से बनाई जाती है। खादी से बनी शॉल अधिक गर्म होती है और पारंपरिक होने के कारण लोग इसे काफी महत्व देते हैं। इसकी कीमत 500 रुपये से शुरू है।
बनारसी शॉल की भी मांग
दुकानदार सतीश बताते हैं कि इस साल ठंड में शॉल को महिलाओं की ओर से फैशन के लिए ज्यादा खरीदा जा रहा है। महिलाएं शादी, पार्टी में ज्यादातर बनारसी शॉल की मांग करती हैं। वहीं हल्की शॉल जिनमें ऊनी व वूलमार्क शॉल आती है, जो हर वर्ग के लिए सस्ते दाम से शुरू है जिन्हें सब आसानी से खरीद सकते हैं। इस समय ज्यादा लुधियाना और पानीपत से आ रही लोकल शॉल को भी ज्यादा खरीदा जा रहा है जो सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं।
कश्मीरी ब्रांड पर ज्यादा जोर
कश्मीरी सिल्क स्टोर के मालिक जितेंद्र पाल सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा पश्मीना शॉल को महिलाएं अपने आप को अच्छा लुक देने के लिए व साथ ही कश्मीर की ब्रांड होने पर खरीदती हैं। इसे बनाने में 250 घंटे लगते हैं। साथ ही बताया कि असली पश्मीना शॉल की कीमत 8,000 रुपये से शुरू है। इसकी अच्छी गुणवत्ता होने पर इसकी देशभर में काफी मांग रहती है।