संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। विधवा के आधार कार्ड नंबर को बैंक में एक अन्य खाते से लिंक कर नौ वर्ष से उसकी पेंशन डकारने का मामला सामने आया है। महिला ने जब फैमिली आईडी बनवाई तो पता चला कि 2015 से उसकी पेंशन दी जा रही है, लेकिन हकीकत में उसे कोई पेंशन नहीं मिल रही थी। इस प्रकरण में समाज कल्याण के अधिकारी, बैंक के बीसीए और पेंशन लगवाने वाले एजेंट के साथ ही एक दिव्यांग का नाम सामने आया। जिनके जरिए पेंशन किसी अन्य खाते में पहुंच रही थी जबकि महिला वर्ष 2015 से ही अपनी पेंशन के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही थी। जब किसी ने फरियाद नहीं सुनी तो नवंबर 2022 में मुख्यमंत्री से मिलकर उसने अपनी शिकायत रखी। जिसके बाद विजिलेंस और एडीसी को संयुक्त जांच सौंपी गई। जांच में आरोपियों के नाम सामने आने पर केस दर्ज कराया गया।
सैदपुर निवासी सुखविंद्र पहलवान ने बताया कि उसकी मां सुशीला ने विधवा पेंशन के लिए वर्ष 2015 में आवेदन किया था। आवेदन के लिए दो माह का समय दिया गया था। यह वक्त बीतने के बाद समाज कल्याण विभाग में पता किया तो आवेदन को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों ने फिर से दो माह का समय दे दिया। अधिकारी आश्वासन देकर मामले में टालमटोल करते रहे। 2021 में महिला ने कॉमन सर्विस सेंटर पर परिवार पहचान पत्र के लिए आवेदन किया तो पेंशन में धांधली का मामला उजागर हुआ। पता चला कि विधवा की पेंशन दिसंबर 2015 से लगी है जबकि पेंशन महिला के खाते में जाने के बजाय सुशील नाम के किसी व्यक्ति के खाता संख्या 40068100001459 में हर महीने जा रही थी। जिसके बाद पीड़ित समाज कल्याण विभाग में फरियाद लगाई मगर अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की।
पीड़ित ने अधिकारियों को पेंशन आईडी नंबर 5796369 भी दिखाया मगर वे नहीं माने। उसके बाद समाज कल्याण अधिकारी को 13 जनवरी 2022 को शिकायत पत्र लिखा। जिसके बाद अधिकारियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा में जाने के लिए कहा। नई अनाज मंडी करनाल बैंक शाखा में जाने के बाद पता चला कि आधार कार्ड और मोबाइल नंबर सुशील ने अपने खाते खुलवाते समय पेश किया था, लेकिन जब समाज कल्याण विभाग ने पेंशन आईडी चेक की तो पता चला कि राजेंद्र के नाम पर पीड़ित की पेंशन जारी की जा रही है।
अब सुशील की जगह राजेंद्र के खाते में पेंशन जाने की बात सामने आने पर पीड़ित ने दोबारा जिला समाज कल्याण विभाग में आधार कार्ड नंबर की जांच कराई तो पता चला कि राजेंद्र को विकलांगता पेंशन मिल रही है। इसके बाद भी गड़बड़ी को ठीक नहीं किया गया और समाज कल्याण अधिकारी टालमटाेल करते रहे। बाद में मुख्यमंत्री से फरियाद लगाई तो जांच विजिलेंस और एडीसी को संयुक्त रूप से दी गई। जांच में खुलासा होने पर पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने बैंक के बीसीए प्रेमचंद, राजेंद्र और सुशील के खिलाफ केस दर्ज किया है।
बीसीए ने जमा करवाई लाखों की रिकवरी
सुशीला देवी की पेंशन आईडी के साथ वीर बडालवा निवासी राजेंद्र का खाते की केवाईसी भी बैंक ऑफ बडोदा की नई अनाज मंडी शाखा में की गई थी। राजेंद्र ने जांच के दौरान लिखित तौर पर बयान दिया कि वह 85 फीसदी दिव्यांग है और तीन से चार साल पहले दिव्यांग पेंशन के लिए आवेदन किया था। माजरा रोडान निवासी सतपाल के कहने पर बैंक ऑफ बड़ौदा में अपना खाता खुलवाया था। जिसके लिए सतपाल ने 12000 रुपये राजेंद्र से लिए थे। 24 अगस्त 2022 को उसने 112250 की रिकवरी जमा करवाई और 12 सितंबर को ब्याज की राशि 35389 जमा कराई। जबकि यह रकम बैंक के बीसीए प्रेमचंद ने सतपाल से जमा करवाई थी।
मेरी जानकारी में यह मामला नहीं है। सोमवार को कार्यालय में आने के बाद इसकी जांच कराकर ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है।
- सत्यवान ढिलोड, समाज कल्याण अधिकारी
महिला की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
- कमलदीप, एसएचओ, सिटी