संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। विकास क्लब साहित्य कला मंच कुंजपुरा की ओर से साझा विरासत मंच की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन क्लब प्रांगण में किया गया। शुरुआत सरस्वती वंदना से कुमारी शैजल ने की। वरिष्ठ शायर हरबंस लाल पथिक ने आज के हालात पर कटाक्ष किया। कहा, ‘सच का जो साथ देगा आज के इस दौर में, देख लेना फिर उसे फांसी चढ़ाया जाएगा’।
साझा विरासत मंच संस्थापक वरिष्ठ कवि प्रेम पाल सागर ने सुनाया- वो झुलसती आग में आखिर जिएगी किस तरह, दरिया जब सुखा दिए मछलियों के सामने।रचनाकार राजकुमार मायूस ने सुनाया-ऐसा क्या है तुझ मैं कि मैं भूलता नहीं, राह देखती है तेरा आंखें अश्कों से भरी हुई। डॉ़ एसके शर्मा ने सुनाया - कोई तो मुझ से पूछे मैं क्या चाहता हूं, मैं बस उसकी मुहब्बत चाहता हूं। वरिष्ठ शायर डॉ़ कमर रईस ने पंक्तियां प्रस्तुत की-निगाहों से उनकी पिए जा रहे हैं, मजा ज़िंदगी का लिए जा रहे हैं।
कवि दलीप खरेरा, रामेश्वर देव, ममता प्रवीण, आशीर्वाद, चन्द्रवती दीक्षित, डॉ़ इंदू शर्मा, राजपाल राजन, पूर्ण चंद शर्मा, मामराज, संस्था अध्यक्ष परमिंदर भाटिया, अधिवक्ता तमन्ना शर्मा, मधु शर्मा, पंकज गहलोत, गुरमुख सिंह वैड़च, सौरव गुप्ता आदि ने भी बेहतरीन प्रस्तुति दी। संचालन कवयित्री ममता प्रवीण ने किया। अध्यक्षता करनाल के वरिष्ठ शायर डॉ़ एसके शर्मा ने की। डॉ़ कमर रईस सोनीपत मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ शायर हरबंस लाल पथिक, कवि दलीप खरेरा और गुरमुख सिंह वैड़च रहे।