संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सदर बाजार के माता राम प्यारी दुर्गा मंदिर में आयोजित हवन में मुख्य यजमान वैद्य देवेंद्र बत्तरा, दर्शना बत्तरा और अन्य श्रद्धालुओं ने आहुतियां डालकर विश्व शांति की कामना की। कथा में पंडित चेतन देव ने कहा कि नारद जी कहते हैं कि जिस घर में तुलसी का वृक्ष होता है उस घर में यमदूत कभी प्रवेश नहीं कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग तुलसी का वृक्ष लगाते हैं वे यमपुरी नहीं देखते। नर्मदा गंगा जी का जल और तुलसी का पूजन ये तीनों कार्य बराबर हैं। चाहे मानव जितना भी क्यों न पापी हो मृत्यु के समय उसके प्राण मंजरी सहित निकल जाते हैं। वह पापों से मुक्त होकर भगवान के बैकुंठ धाम को प्राप्त होता है। जो मनुष्य तुलसी और आंवले की छाया में अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं उन्हें मोक्ष प्राप्त हो जाता है।
कार्तिक कथा में प्रवचन करते हुए स्वामी परमानंद ने बताया कि एक बार माता राधा रानी ने गोपियों के संग श्री कृष्ण जी से विनती की कि श्री कृष्ण जी आप जहां पर रहते हैं सारे वहीं पर आ जाते हैं। दुर्वासा ऋषि शिवजी के अंश हैं। अगर दुर्वासा जी से मिलना हो तो उनके लिए बहुत सारे पकवान लेकर जाएं, उन्हें भूख बहुत लगती है। जहां दुर्वासा ऋषि रहते हैं बीच में यमुना मैया हैं, उनसे मिलने के लिए यमुना पार करनी पड़ती है, उन्हीं दिनों में यमुना में पानी बहुत ज्यादा था, तब राधा रानी गोपियों के संग यमुना मैया से प्रार्थना करने लगी कि अगर हमारे श्री कृष्ण जन्म के ब्रह्मचारी हैं तो यमुना मैया हमें रास्ता दो। तब यमुना मैय्या ने उन्हें जाने के लिए रास्ता दे दिया।
राधा रानी गोपियों के संग यमुना पार करके दुर्वासा जी के आश्रम में पहुंची। दुर्वासा जी ने कहा कि आप मेरे खाने के लिए क्या लेकर आई मुझे बहुत ज्याद भूख लगी है, पहले खा लूं फिर आपसे बात करता हूं। दुर्वासा जी ने भोजन करके राधा रानी से बातचीत शुरू की। जब राधा रानी गोपियों संग वापस चलने लगी तब उन्हें याद आया कि अब वापसी पर यमुना मैया से रास्ता कैसे मांगूं। यह बात तो श्री कृष्ण जी से पूछी ही नहीं, तब उन्होंने दुर्वासा जी से पूछा कि यमुना नदी के पार जाने का कोई उपाय हो तो हमें बताएं। उन्होंने कहा कि यमुना जी को कहना दुर्वासा ऋषि दूब खाकर रहते हैं। यमुना मैया हमें रास्ता दो, यमुना मैय्या ने रास्ता दे दिया। राधा रानी गोपियों संग वापस आ गई।