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ठगी का शिकार हुआ तो दे दी जान, परिजनों का हंगामा

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गांव औंगद में 25 वर्षीय एक आइलेट्स प्रशिक्षक ने जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट
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भी छोड़ा है, जिसमें उसने 35-40 लाख रुपये की धोखाधड़ी को आत्महत्या की वजह बतायी है। साथ ही आरोपियों के नाम का भी खुलासा किया है। यही नहीं मरने से पहले उसने अस्पताल में बयान भी दर्ज कराए, लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस के जांच अधिकारी ने आरोपियों से मिलकर उसके बयान बदल दिए। उन्होंने पुलिस पर आरोपियों से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए शनिवार को जमकर हंगामा काटा। इस दौरान उन्होंने थाने के गेट पर ताला जड़ दिया। दो घंटे तक परिजनों और ग्रामीणों ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया। साथ ही पुलिस जांच अधिकारी और थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग करते रहे। सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने करनाल-कैथल मार्ग भी करीब 15 मिनट तक जाम लगाया। इसके बाद मौके पर पहुंचे डीएसपी ने आक्रोशित लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
परिजनों के अनुसार सचिन कुुरुक्षेत्र में आइलेट्स प्रशिक्षक था, जहां उसकी बात विकास वासी चंदलाना जिला कैथल से हुई। विकास ने कहा कि वह वीजे लगवाने का काम करता है। विकास ने सचिन से छह आवदेकों के पासपोर्ट ले लिए ओर फर्जी डाक्यूमेंट बना दिए। बदले में उसने 35-40 लाख रुपये वसूल लिये। इसके बाद वीजे नहीं लग पाए और कैंसिल हो गए। इसके बाद वीजा नहीं लगने से सभी आवेदक सचिन से अपने पैसे मांगने लगे। इस पर उसने विकास से बात की और पैसे लौटाने को कहा, लेकिन विकास पैसे देने से मुकर गया। इससे सचिन ने मानसिक रूप से तनाव में आकर जहरीला पदार्थ निगल कर आत्महत्या कर ली। इससे पहले उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां पुलिस ने उसका बयान भी दर्ज किया था। परिजनों का पुलिस पर आरोप है कि सचिन ने 19 फरवरी को जब जहर निगला तो 20 फरवरी को थाना से पुलिस जांच अधिकारी परमजीत करनाल बयान दर्ज करने के लिए गये। उन्होंने सचिन पर दबाव बनाकर कहा कि यदि तू बच गया तो तेरे खिलाफ भी केस दर्ज हो जाएगा, इसलिए इस कोरे कागज पर साइन कर दे। आरोप है कि जांच अधिकारी ने कोरे कागज पर सचिन के साइन करवा लिए और आरोपी विकास चंदलाना के पक्ष में असली बयानों को फाड़ दिया। कोरे कागज पर आरोपी पक्ष के बचाव के लिए मनगढ़ंत बयान लिख लिए। इससे नाराज परिजन और ग्रामीणों ने शनिवार को दोपहर करीब एक बजे निसिंग थाना के मुख्य गेट पर हंगामा काटा।
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आश्वासन के बाद कराया अंतिम संस्कार
21 फरवरी को उपचार के दौरान ही अस्पताल में सचिन ने दम तोड़ दिया था, लेकिन परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार नहीं किया था, शनिवार को विरोध प्रदर्शन के बाद डीएसपी से आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने शाम को गांव में अंतिम संस्कार कराया।
खर्चे पानी के लिए जांच अधिकारी ले गया 500 रुपये : पिता
मृतक के पिता जयप्रकाश ने जांच अधिकारी परमजीत पर आरोप लगाते हुए बताया कि उसने बयान लेने के बाद मुझे गाड़ी में बुलाया और खर्चा पानी के नाम पर पैसे मांगे और मुझसे 500 रुपए रिश्वत लेकर चला गया। इसका उसके पास कोई सबूत नहीं है, लेकिन वह यह बात मंदिर में कह सकता है। इस मामले में पुलिस कर्मचारी से भी पूछताछ की जानी चाहिए।
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वर्जन।
परिजनों द्वारा पेश किए गए सुसाइड नोट के आधार पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मोबाइल कॉल की जांच कराई जायेगी , यदि कोई पुलिस कर्मचारी भी इस मामले में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। -दलबीर सिंह, डीएसपी असंध।
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