- सैनिक स्कूल में मनाया गया 65वां स्थापना दिवस, मुख्य अतिथि जनरल संजय हुडा ने भरा देश सेवा का जोश
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल/कुंजपुरा। जय हिंद सर। बोलकर जैसे ही सेल्यूट किया तो मुख्यातिथि जनरल ने मेधावी विद्यार्थियों के कंधे पर फीती लगाकर सम्मानित किया। जैसे ही निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किया गया तो उनका चेहरा खुशी से चमक उठा। वहीं सभागार भी तालियों से गूंज उठा। मौका था सैनिक स्कूल के स्थापना दिवस समारोह का। वीरवार को हुए 65वें स्थापना दिवस समारोह में विद्यार्थियों में खूब उत्साह दिखाई दिया।
समारोह में सेना मेडल एवं चीफ ऑफ स्टॉफ हेड क्वार्टर 2 अंबाला के जनरल संजय हुड्डा ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। इस स्थापना दिवस के उत्सव का प्रतिनिधित्व कर रहे सैनिक स्कूल कुंजपुरा के प्रधानाचार्य कप्तान गुरबीर सिंह ने सर्वप्रथम मुख्य अतिथि का औपचारिक स्वागत किया। विद्यालय के सिंह द्वार से अतिथिशाला ग्रे कॉटेज तक अश्वारोहण के माध्यम से मुख्य अतिथि का काफिला निकला गया। इसके बाद विद्यालय के वार मेमोरियल में मुख्य अतिथि ने शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि दी।
विद्यालय के प्राचीन परंपरा के अनुसार एनसीसी छात्रों ने गॉर्ड ऑफ ऑनर के माध्यम से मुख्य अतिथि को सलामी दी। इसके बाद मुख्यातिथि सभागार में पहुंचे। प्रधानाचार्य ने सर्वप्रथम विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। विद्यालय के वार्षिक उपलब्धियों का विवरण देते हुए प्रधानाचार्य अग्रिम योजनाओं पर भी चर्चा की। इस दौरान वर्ष भर की खेलकूद सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में अव्वल रहे और अपनी-अपनी कक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को व्यक्तिगत रूप से पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डिप्टी जीओसी सब एरिया के ब्रिगेडियर एचएस संधू सेना मेडल ने शिरकत की। उप प्रधानाचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल निर्मलजीत सिंह, प्रशासनिक अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर सोनिया शर्मा, वरिष्ठ अध्यापक संजय चौहान और सुरेंद्र सांगवान मौजूद रहे।
संस्कारों को न भूलें, यही हमारी पहचान : हुड्डा
मुख्य अतिथि जनरल संजय हुड्डा ने विद्यार्थियों से कहा कि नई पीढ़ी से देश को बहुत उम्मीदें हैं। इसी से देश भी हमारा आधुनिक माना जाने लगा है। एक समय था, जब बच्चों के ज्ञान को कमजोर माना जाता था लेकिन आज के समय में बच्चे एडवांस हैं, इन्हें केवल सही दिशा देने के लिए मार्गदर्शन की जरूरत है। बच्चों को अपने घर के संस्कारों को भी नहीं भूलना। यही संस्कार भारत की संस्कृती और हमारी पहचान भी हैं। प्रधानाचार्य ने मुख्य अतिथि को विद्यालय स्मृति चिन्ह प्रदान किया। विद्यालय के विभिन्न छात्र पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। अपनी-अपनी कक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले उत्कृष्ट छात्रों को पुरस्कृत किया गया। शिक्षा और खेल के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाले सदन अध्यक्षों को भी सम्मानित किया गया।