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Karnal News: कानों की जांच करने वाली मशीन खराब, करें इंतजार

Sat, 30 Mar 2024 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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अनुज शर्मा
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करनाल। जिला नागरिक अस्पताल को नौ साल के लंबे इंतजार के बाद ऑडियोलॉजिस्ट मिलने पर नवजात शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक के कानों की सुनने की क्षमता व मुंह के बोलने की क्षमता की जांच होने की आस जगी थी। जब ऑडियोलॉजिस्ट ने ऑडियोमेट्री मशीन को खोलकर चलाने की कोशिश की तो उनमें तकनीकी खराबी मिली।
ऐसे में जिले के मरीजों को फिर से अपने कानों की सुनने व मुंह के बोलने की क्षमता की जांच करवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि ऑडियोमेट्री मशीन पूरी तरह से विदेशी है। ऐसे में उसे ठीक होने में लंबा समय लग सकता है। डॉक्टरों की माने तो मशीन की कीमत लगभग 18 से 20 लाख के करीब है।
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जिला नागरिक अस्पताल में सुनने व बोलने की समस्या से पीड़ित मरीजों की जांच के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ऑडियोग्राफी मशीन लाई गई थी। अस्पताल प्रबंधन ने एक बार देखकर वापस मशीन के चारों हिस्सों को अटैचियों में बंद करके ऑडियोमेट्री कक्ष में रख दिया गया था। तब से लेकर अब तक ऑडियोग्राफी मशीन धूल फांक रही थी।
वजह वर्ष 2015 में ऑडियोग्राफी मशीन आने के बाद से अब तक नागरिक अस्पताल में ऑडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त था। जिस कारण नागरिक अस्पताल में ऑडियोलॉजिस्ट न होने के कारण गंभीर मामलों में ईएनटी विशेषज्ञ मरीजों की जांच के लिए उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर रहे थे लेकिन वहां भी मरीजों को कोई राहत नहीं मिल रही थी। वहां पहले से ही मरीजों का अधिक बोझ होने के कारण नागरिक अस्पताल के रेफर मरीजों का बोझ भी बढ़ने से उन्हें डेढ़ से दो साल तक की तिथि दी जा रही थी।
जिले को नौ साल के लंबे इंतजार के बाद अपूर्वा शर्मा के रूप में एक ऑडियोलॉजिस्ट मिली लेकिन जब ऑडियोलॉजिस्ट ने अपना पद संभालकर ऑडियोमेट्री कक्ष की साफ-सफाई करने के बाद लंबे समय से अटैचियों में बंद पड़ी मशीन को बाहर निकाला और उसे चलाने की कोशिश की।
कुछ तकनीकी खराबी होने के कारण मशीन को करीब 15 दिन से अधिक समय के बाद भी चलाया नहीं जा सका है। ऐसे में जिले के सुनने व बोलने की बीमारी से पीड़ित मरीजों को ऑडियोलॉजिस्ट आने के बावजूद मेडिकल कॉलेज व पीजीआई चंडीगढ़ रेफर करना पड़ रहा है। संवाद
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सोमवार को नागरिक अस्पताल में स्वयं मशीन की जांच करवाएंगे। मशीन खराब मिलती है तो जल्द ठीक करवाया जाएगा, जिससे जिले भर के मरीजों को अपने ही शहर में इलाज मिल सकें। - डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, करनाल।
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