माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) के निदेशक डॉ.रतन तिवारी ने कहा कि देश में गेहूं की पैदावार तय लक्ष्य से अधिक हुई है। अभी अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है लेकिन तीसरी रिपोर्ट में ही गेहूं की पैदावार 2.1 मिलियन मीट्रिक टन पार हो गई है।
उन्होंने किसानों को ये समझाया जा रहा है कि आने वाली पीढ़ी को यदि मृदा संपदा को सही सलामत सौंपना है तो कीटनाशक, खरपतवार नाशक जैसे केमिकल वाली दवाओं को कम और अंधाधुंध खाद का प्रयोग रोकना होगा।
आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ.रतन तिवारी ने बताया कि पिछले साल देश में गेहूं की कुल पैदावार 113.29 मिलियन टन थी। इस साल का केंद्र सरकार ने गेहूं की पैदावार का लक्ष्य 115.4 मिलियन मीट्रिक टन रखा था लेकिन ये खुशी की बात है कि नई उन्नतशील किस्मों, सही मौसम और किसानों की मेहनत से पैदावार ने लक्ष्य को पार कर दिया है। अभी तक तीसरी सर्वे रिपोर्ट आई है, जिसमें गेहूं की कुल पैदावार 117.5 मिलियन टन बताई है, जो लक्ष्य से 2.1 और पिछले साल से 4.21 मिलियन टन अधिक है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर चलाए 29 मई से 12 जून तक चलाए जा रहे विकसित कृषि संकल्प अभियान के बहुत अच्छे परिणाम आ रहे हैं।
किसानों से संवाद से वैज्ञानिकों, किसानों के बीच रिश्ता तो प्रगाढ़ हो ही रहा है, किसानों तक नई तकनीकियां, नई जानकारी भी पहुंच रही है।
इस दौरान किसानों ने आवारा पशुओं, खाद व बीज की समय से उपलब्धता नहीं होने जैसी कई समस्याएं बताई हैं, जो संबंधित विभागों को भेजकर निस्तारित कराई जाएंगी, शोध के विषय भी सामने आ रहे हैं, उन पर कार्य किया जाएगा।
इस दौरान मौजूद वैज्ञानिक डॉ.अनिल खिप्पल ने बताया कि खाद्यान्न में केमिकल यानी विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ रही हैं, जो चिंता का विषय है। इसके लिए किसानों को फफूदीनाशक, खरपतवारनाशक, कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करने से पहले पैकिंग पर उसके प्रभाव के तिथि जरूर देखनी चाहिए। जो फसल की कटाई से पहले ही खत्म होनी चाहिए। अच्छा होगा कि ग्रीन लाइनों वाली दवाइयों का ही उपयोग करें। इसके लिए बासमती धान की सीधी बिजाई के लिए कुछ नई किस्में जैसे पूसा-1979, पूसा 1985 दी गई हैं, इनमें ब्लाइट, ब्लास्ट जैसी बीमारियां नहीं आती है, जिससे दवाओं के स्प्रे की जरूरत नहीं पड़ती है।
बीमारी से प्रभावित पूसा 1509 के स्थान पर पूसा 1847 व पूसा 1121 के स्थान पर पूसा 1885 किस्म रिलीज की है, इससे किसान लगाए, पैदावार भी बढ़ेगी, रोग भी कम होंगे। खाद को मृदा कार्ड में दी गई सलाह के आधार पर ही लगाएं, क्योंकि संलाद में पता चला कि किसान जरूरत से ढाई से तीन गुना तक अधिक यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं। इस मौके पर वैज्ञानिक डॉ.अमित शर्मा भी मौजूद रहे।