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व्हाट्सऐप ग्रुप से चलता है ओवरलोडिड का धंधा

Fri, 13 May 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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ओवरलोडिड - फोटो : अमर उजाला
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ओवरलोडिड वाहनों के खिलाफ प्रदेश सरकार के कड़े निर्देशों के बावजूद ओवरलोडिड वाहनों पर रोक नहीं लग पा रही है। पहले माफिया सेटिंग के दम पर इनको चलाता था, लेकिन अब माफिया के लोगों ने सरकार के सख्त रवैये को देखते हुए ओवरलोडिड वाहनों को चलाने का नया तरीका ईजाद कर लिया है। पंचकूला से लेकर सोनीपत तक ओवरलोडिड वाहनों के माफिया का जाल फैला हुआ है। सभी ने मिलकर एक वाट्सएप ग्रुप बना रखा है। इसमें किसी भी जिले की आरटीए टीम की चेकिंग व लोकेशन आदि पल पल में अपडेट की जाती है। ऐसे में गिरोह के सदस्य लगातार अपनी गाड़ियों को अपडेट करते हैं। इतना ही नहीं इन सभी जिलों में आरटीए आफिस के बाहर व अधिकारियों के घर पर भी माफिया के लोग निगरानी करते हैं।
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गौरतलब है कि ओवरलोडिड वाहनों को गुजारने का बड़े स्तर पर खेला होता रहा है। प्रदेश सरकार इस मसले को लेकर शुरू से ही काफी संजीदा है। प्रदेश सरकार ने ओवरलोडिड वाहनों पर शुरू से ही शिकंजा कसा हुआ है। आरटीए समेत पुलिस लगातार ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। अकेले करनाल में धड़ाधड़ चालान करने 50 लाख रुपये जुर्माना प्रति माह वसूला जा रहा है। सरकार व विभाग के सख्त रवैये को देखते हुए ट्रांसपोर्ट से जुड़े माफिया के सदस्यों ने एक नया तरीका अपनाया है। उन्होंने पंचकूला से लेकर सोनीपत तक के ट्रांसपोटर्स के नंबरों को जोड़कर एक वाट्सएप ग्रुप बनाया है। इसमें पूरे जीटी बेल्ट के वाहन संचालकों के नंबर हैं। अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, व सोनीपत जिले शामिल हैं। रात के समय ओवरलोडिड वाहन जहां से चलते हैं तो वे पहले आरटीए विभाग के कर्मचारियों की लोकेशन लेकर ही चलते हैं। अहम बात यह है कि उनके पास विभाग की सरकारी गाड़ियों के अलावा स्टाफ के सदस्यों की निजी गाड़ियों के भी नंबर हैं और पल पल की उनकी लोकेशन लेते रहते हैं।

माफिया के पास सब जानकारी
हाल ही में विभाग को माफिया से जुड़े लोगों की कुछ रिकार्डिंग हाथ लगी हैं। जिसमें वे कह रहे हैं कि आरटीए की लोकेशन ये है और अब वे कहां पर जाने वाले हैं। आफिस से घर और घर से कब निकलते हैं, यह भी उन्हें जानकारी रहती है। आरटीए ने तो यह भी आशंका जताई है कि आफिस के बाहर भी कुछ संदिग्ध लोग दिनभर खड़े रहते हैं, ताकि वे लोकेशन दे सकें। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर ओवरलोडिड वाहनों को रोका और चलाया जाता है। ये लोग एक एक जिला क्रास कराते हैं और हर जिले में अलग गुप्तचर लगे रहते हैं और दिन और रात स्टाफ के बारे में अपडेट देते रहते हैं।
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मोटे पैसे लिए जाते हैं सूचनाओं के
सूत्रों का कहना है कि आरटीए स्टाफ की रेकी व निगरानी के लिए जिन लोगों को छोड़ा गया है, उनको मोटी रकम प्रति माह के हिसाब से दी जाती है। एक एक जिले में पांच से दस दस सदस्य इस काम लगे रहते हैं। इनमें से कुछ लोग आरटीए आफिस के बाहर रहते हैं तो अन्य फील्ड में से सूचनाएं देते हैं। ये सदस्य वाट्सएप ग्रुप में संबंधित अधिकारी और उसकी गाड़ी का नंबर भी डालते हैं कि कौन किस दिशा में जा रहा है। अहम बात यह भी है कि सूचनाएं देने वाले इन लोगों के पास गाड़ी समेत अन्य तरह की सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं।

जो गाड़ी जहां होती है उसे रोक लिया जाता है
कई बार माफिया के लोग सच्ची सूचना देकर भी अपने एक दो वाहन को पकड़वा देते हैं और दूसरे रास्ते से दर्जनों ओवरलोडिड वाहनों को गुजार देते हैं। माफिया के लोग स्टाफ को एक गाड़ी पर व्यस्त कर देते हैं, जबकि अन्य रास्तों से वाहनों को भेज देते हैं। बता दें कि करनाल आरटीए आफिस में स्टाफ की कमी है। दिन में आफिस ड्यूटी के बाद स्टाफ के सदस्य रात को ओवरलोडिड वाहनों को पकड़ते हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण माफिया के सदस्य नए रास्ते निकाल लेते हैं। बता दें कि आरटीए आफिस के पास एक ही गाड़ी है और जब भी वह गाड़ी शहर के किसी भी सड़क पर जाती है तो तुरंत माफिया के सदस्यों को इसकी जानकारी मिल जाती है। अनुमान है कि जीटी रोड से अकेले रात में करीब 20 हजार से ज्यादा बड़े ओवरलोडिड वाहन गुजरते हैं। विभाग लाख कोशिश के बावजूद इन पर रोक नहीं लगा पा रहा है। हालांकि, विभाग प्रति माह 50 लाख रुपये का जुर्माना वसूल रहा है।

वर्जन
किसी भी सूरत में ओवरलोडिड वाहनों को बक्शा नहीं जाएगा। स्टाफ के सदस्य दिन रात चेकिंग करते हैं और ओवरलोडिड वाहनों पर नकेल कस रखा है। हमें इस तरह की लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ लोग स्टाप सदस्यों की रेकी और निगरानी करते हैं। बावजूद इसके हम घबराने वाले नहीं हैं।
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प्रदमन सिंह, आरटीए, सचिव।
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