संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। समालखा की जैन स्थानक में चातुर्मास प्रवास के दौरान धर्म सभा को संबोधित करते हुए पंडित रत्न शास्त्री उपेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि सांसारिक लोग कहते हैं कि यह मकान मेरा है, यह बगीचा मेरा बनाया हुआ है। लेकिन संसार में कोई भी साथी और वस्तु स्थाई नहीं है। मृत्यु के महामार्ग पर मनुष्य को अकेला ही चलना होगा। उन्होंने कहा कि कि जब तुम्हारे जाने की बारी आएगी। तब तुम जिस प्राण प्यारी पत्नी पर गर्व करते हो, वह मृत्यु के समय विलाप करती हुई एक कोने में बैठी रहेगी। अत्यंत स्नेह रखने वाली माता भी घर के बाहर केवल दरवाजे तक पहुंचाने आएगी।
उन्होंने कहा कि स्वजन परिजन, मित्रजन केवल श्मशान तक ही साथ आयेंगे। उपेंद्र महाराज ने कहा कि पृथ्वी पर हर मिनट में 33 आदमियों की मृत्यु होती है। गरीब भी मरते हैं और अमीर भी। परंतु किसी के साथ कुछ नहीं जाता। प्रतिदिन सोचो कि मेरी भी यही गति होगी । राजे-महाराजे भी मौत के अधीन होकर फौज, खजाना तथा रनिवास आदि सबको छोड़कर अकेले ही गए। कोई किसी को साथ नहीं ले जा सके। यह निश्चित है कि यह जीव अकेला आया है और अकेला ही जाएगा। इस अवसर पर इंद्रेश मुनि ने दरिद्वता को जीवक का अभिषेक बताया। सध्छेत मुनि ने कहा कि प्रेम हृदय का अमृत है इसलिए सारे संसार को परिवार समझकर चलें।