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हर चुनौती का जवाब देने को तैयार हम

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राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को सीनियर सेकेंडरी स्कूल काछवा की लाइब्रेरी में अमर उजाला की ओर से अपराजिता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें लड़कियों ने खुलकर अपने विचारों को साझा किया और अपनी समस्याएं भी बेबाकी के साथ रखीं। उन्होंने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी बालिका में असुरक्षा की भावना खत्म नहीं हुई है। ऐसे में बालिकाओं को अधिकारों के प्रति जागरूक रहकर हर मुसीबत का जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। कार्यक्रम में नौवीं से 12वीं कक्षा तक की छात्राएं शामिल हुईं।
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- लड़कियों को पहले अपने आप को इतना शक्तिशाली बनाना पड़ेगा ताकि वह किसी भी मुसीबत को पहले ही भांप सकें और उसका समय आने पर डटकर सामना कर सकें। किसी भी अपरिचित इंसान पर जल्दी विश्वास न करें कि वह आपके मौके का फायदा उठा सकें।
--प्रधानाचार्य, उर्वशी विग, काछवा
-मां-बाप को और अध्यापक को भी सुनना चाहिए कि बच्चे को किस तरह की दिक्कत आ रही है। इसके अलावा बच्चे को भी यह ध्यान देना होगा कि अगर मां-बाप और अध्यापक किसी कारण व्यस्त हैं तो बच्चा धैर्य न खोए और अपनी बात को किसी न किसी तरीके से उनको जरूर बताए।
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डॉ रेखा, अध्यापिका, इकोनॉमिक्स
-संगीता ने कहा कि हमें अपने बच्चों को ऐसा मजबूत बनाना है कि वह किसी पर निर्भर होने की बजाय अपना आत्मविश्वास न खोए और किसी भी मुसीबत का डटकर सामना करे। लड़की यह न सोचे कि वह लड़की है तो कुछ कर नहीं सकती। आज लड़कियां हर क्षेत्र में आगे हैं।
संगीता , पीजीटी, संस्कृत
-हम अपने आप को सुरक्षित नहीं मानते। हर जगह जाने से पहले हमें डर लगा रहता है कि कहीं कोई हमें परेशान न करे। इसलिए हमें हिम्मत रखनी चाहिए कि अगर कोई हमें छेड़े तो पलट कर जवाब दें ।
पायल
-आज आधे से ज्यादा शोषण घर के परिचित सदस्यों के द्वारा ही होता है। इसलिए यह जरूरी है कि हम समझें कि सामने वाले की नजर कैसी है।
सोनिया छात्रा कक्षा 11
-मुझे राय फार्म से अकेले आना जाना पड़ता है इसलिए माता-पिता ने मुझे बोल रखा है कि किसी से डरना नहीं है और अगर फिर भी कोई दिक्कत आती है तो हम अपने आप संभाल लेंगे।
सिमरन, छात्रा कक्षा 9
-अगर कोई भी घटना हो तो उसे छुपाने की बजाये अपने मां-बाप को जरूर बताएं क्योंकि गलत करने वाला इंसान खुद ही गलत होता है न कि हम।
शिवानी, कक्षा-10
-गांव में स्कूल आते समय हमें रास्ते में ठेके पर लोग अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। जिसके कारण स्कूल जाने-आने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए अगर स्कूल के आसपास इस तरह की चीजें न हो तो ज्यादा अच्छा होगा।
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-पायल
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