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मुलाना मेडिकल कालेज ने खड़े किये हाथ, आज से केवल गंभीर मरीज को ही लेंगे, शेष को खुद करें हैंडिल

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प्रदेश सरकार की ओर से कोविड अस्पताल बनाए गए अंबाला जिले के मुलाना स्थित एमएम मेडिकल कालेज ने अब मरीजों को दाखिल करने को लेकर हाथ खड़े कर दिये हैं। जीटी बेल्ट के सभी जिलों में काफी संख्या में कोरोना पाजिटिव केस आ रहे हैं। इनमें से ज्यादा ऐसे हैं, जिनको किसी प्रकार का लक्षण भी नहीं है। ऐसे में अब मुलाना मेडिकल कालेज ने इमरजेंसी छोड़कर अन्य केसों को लेने से इंकार कर दिया है।
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सरकार से हुए अनुबंध के अनुसार, मुलाना मेडिकल कालेज ने कोरोना संक्रमित लोगों के लिए 200 बेड रिजर्व किये थे, लेकिन जिस प्रकार से आसपास के जिलों में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, उससे ये बेड कम पड़ते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि मेडिकल कालेज के करीब 170 बेड भर चुके हैं। शेष बेड को मेडिकल कालेज ने संभावित इमरजेंसी और खुद के स्टाफ के लिए रिजर्व किया है। ऐसे में अब करनाल समेत अन्य जिलों को कोरोना पाजिटिव केसों के लिए खुद की प्रबंध करने होंगे। अब तक करनाल जिले से मिलने वाले सभी कोरोना पाजिटिव मरीजों (लक्षणों और बिना लक्षणों वाले) को मुलाना मेडिकल कालेज भेजा जाता रहा है। हालांकि, इससे पहले इन मरीजों को शाहाबाद के आदेश मेडिकल कालेज भेजा जाता था। इस समय पिछले एक सप्ताह से करनाल में रोजाना 8 से 10 कोरोना पाजिटिव केस मिल रहे हैं। अकेले करनाल से 78 के करीब मरीज मुलाना मेडिकल कालेज में दाखिल हो चुके हैं। इसके अलावा, वहां पर कैथल, अंबाला और कुरुक्षेत्र जिले से भी मरीज पहुंच रहे हैं।
सरकार से कालेज का यह है अनुबंध
सरकार से हुए अनुबंध के अनुसार कोरोना के प्रति मरीज को कालेज में दस दिन रखा जाएगा और कालेज को इसके बदले प्रतिदिन प्रति मरीज के हिसाब से 2400 रुपये मिलेंगे। बताया जाता है कि कैथल और कुरुक्षेत्र को बिल भेजे जा चुके हैं, जबकि करनाल जिले के बिल तैयार किये जा रहे हैं। कालेज को अभी तक सरकार की तरफ से कोई भुगतान नहीं हुआ है, जबकि उसका बिल लाखों रुपये में पहुंच चुका है।
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अमर उजाला शुरू से ही उठाता रहा मुद्दा
करनाल जिले में स्थित कल्पना चावला मेडिकल कालेज में ही कोरोना मरीजों को दाखिल कराने को लेकर अमर उजाला इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है। करनाल में तमाम सुविधाएं होने के बावजूद मरीजों को बाहर दाखिल किया जाना सवाल खड़े करता है। क्योंकि कोरोना के उन मरीजों को ज्यादा दवाओं की जरूरत नहीं होती, जिनको कोई लक्षण नहीं होते। उन्हें केवल एक बेड पर रखना होता है और तीन समय का खाना देना होता है।
हम जो भी कर रहे हैं वो प्रदेश सरकार की गाइडलाइन के हिसाब से कर रहे हैं। कोरोना पाजिटिव मरीज जरूर हैं, लेकिन उनको कोई न तो लक्षण है और न ही कोई दिक्कत। इसलिए सामान्य लोगों के लिए बेड को बुक नहीं किया जा सकता। हम केवल गंभीर मरीजों को ही लेंगे, जिनको वाकई में मेडिकल सहायता की जरूरत है। इस बारे में हमने कैथल, कुरुक्षेत्र और करनाल के सीएमओ को फोन पर भी अवगत करा दिया है, साथ ही पत्र भी लिख दिया है। शुक्रवार से कोरोना पाजिटिव के सामान्य मरीजों को संबंधित जिलों को ही व्यवस्था करनी होगी। -डा. एलएन गर्ग, डिप्टी एमएस, एमएम कालेज, मुलाना।
ऐसे मरीज जिसमें कोरोना के लक्षण दिखाई देते हैं, उनको आईसोलेट करने के लिए नीलोखेड़ी स्थित गुरुकुल में रखा जाएगा और बाकी मरीजों को उपचार के लिए मेडिकल कालेज में भर्ती किया जा रहा है। प्रशासन पूरी तरह से तैयार है और हमारे पास पहले से ही सारे बंदोबस्त हैं। क्योंकि कल्पना चावला मेडिकल कालेज को सरकार की ओर से कोविड अस्पताल घोषित नहीं किया गया है, इसलिए पहले यहां पर मरीजों को दाखिल नहीं किया गया।-निशांत यादव, डीसी, करनाल
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