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लक्ष्मण ने बना डाला बिन बिजली का वाटर प्यूरीफायर

Fri, 27 Dec 2013 12:26 AM IST
अमर उजाला, कैथ्ाल
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कैथल में छोटी जोत के किसान और कृषि वैज्ञानिक सातवीं पास लक्ष्मण सिंह ने वह कर दिखाया, जो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। स्वच्छ जल के लिए जहां हम कंपनियों के माध्यम से वाटर प्यूरीफायर पर हजारों रुपये खर्च करते हुए बिजली भी फूंक डालते हैं।
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अब बिना बिजली प्रयोग के 15 साल तक बिना किसी बाधा के स्वच्छ पेयजल हासिल कर सकते हैं। इसके लिए कैथल के गांव सौंगल निवासी सातवीं पास कृषि वैज्ञानिक लक्ष्मण सिंह की ओर से बनाए गए महादेव नीलकंठ सौंगल वाटर प्यूरीफायर की सहायता लेनी होगी।

लक्ष्मण सिंह ने प्राकृतिक वस्तुओं की सहायता से 4 चरणों वाला वाटर प्यूरीफायर बनाया है। जिसे कैथल में विशेषज्ञों ने भी अन्य वाटर प्यूरीफायर के मुकाबले अधिक लाभदायक करार दिया है। वहीं उसे नई दिल्ली स्थित पेटेंट कार्यालय से इसका पेटेंट नंबर भी मिल गया है।
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गरीबी में जीवन गुजार रहे लक्ष्मण सिंह इससे पहले भी कई प्रोजेक्ट बना चुके हैं। जिससे पूरी मानवता का कल्याण हो सकता है, लेकिन अभी उन्हें किसी सरकारी और निजी बड़ी सहायता की दरकार है।

ऐसे काम करता है वाटर प्यूरीफायर
लक्ष्मण सिंह ने बताया कि प्रकृति ने वातावरण में ही काफी चीजें दी हैं, जिनकी सहायता से पानी साफ होता है। उनके वाटर प्यूरीफायर में पहले चरण में पानी एक मिश्रण से गुजरता है, जिसमें जंग, तेजाब, यूरिक एसिड जैसे पदार्थ निकल जाते हैं। इसके बाद दूसरे चरण के मिश्रण में से पानी गुजरता है।

इस मिश्रण से निकलने के बाद पानी में से जिंक, सॉल्ट, सभी प्रकार के केमिकल, फसलों एवं अन्य बारीक अवशेष बाहर आ जाते हैं। तीसरे चरण में पानी से टीडीएस सहित बारीक से बारीक मिश्रित हानिकारक करण बाहर आ जाते हैं। इसके बाद चौथे चरण के मिश्रण में से गुजरने के बाद पानी में कैल्शियम एवं मिनरल्स की कमी को पूरा करते हुए पानी बाहर निकलता है।

सभी चरणों में व्यर्थ पदार्थों के निकलने के लिए अलग पाइप लगे हुए हैं। जिनसे व्यर्थ पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। उसने बताया कि यह प्रकृति द्वारा बनाया गया एकदम शुद्ध पानी है।

बिना बिजली के चलता है
इसे चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं पड़ती। पानी की टंकी से पाइप इस यंत्र के नीचे फिट कर दी जाती है। ऊपर तक पहुंचते-पहुंचते चारों चरणों के बाद पेयजल पानी लेकर प्रयोग किया जा सकता है।

पेटेंट नंबर मिला
नई दिल्ली स्थित पेटेंट कार्यालय से उसे इसके लिए पेटेंट नंबर मिल गया है। अब वह पूरे देश में लोगों के कल्याण के लिए इसे बनाना चाहते हैं। इसमें एचसीटीएम कॉलेज के प्रो. विवेक जांगड़ा, गांव देवीगढ़ के पूर्व सरपंच लालसिंह, फार्मेसी में सहायक प्रोफेसर पूनम उसकी मदद कर रही हैं। एक यंत्र बनाने पर छोटे साइज में 5500 रुपये और बड़े साइज में 8500 रुपये की लागत आई है।

चार माह की मेहनत से तैयार
लक्ष्मण सिंह का कहना है कि यह चार माह में पांच बार के डिजाइन से बनाकर अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें ओर भी सुधार किया जाएगा। यदि कोई कंपनी या सरकार इसे बनाने में मदद करे तो इसका रूप ओर भी सुधर सकता है। जिससे पूरे देश को फायदा मिल सकता है।

सामान्य वाटर प्यूरीफायर से अच्छा रिजल्ट
आरकेएसडी फार्मेसी कॉलेज की सहायक प्रोफेसर पूनम का कहना है कि इस वाटर प्यूरीफायर से साफ किया पानी 99 प्रतिशत से भी अधिक साफ है। इसमें जो मिश्रण तैयार किए गए हैं, उनमें से गुजरने के बाद पानी में से रेत के सभी प्रकार के करण, सोडियम क्लोराइड सहित सभी प्रकार के माइक्रो असेटस निकाल जाते हैं। सामान्य वाटर प्यूरीफायर के फिल्टर को हर छह माह में बदलना पड़ता है, लेकिन इसमें अनावश्यक तत्व साथ-साथ निकलते रहते हैं और जैसा कि ये बता रहे हैं 15 सालों तक इसे बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। दूसरा यह बिना बिजली के चलता है तो अधिक लाभदायक है।

वरदान बन सकता है आविष्कार
आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर डा. जितेंद्र गिल का कहना है कि यह पानी इतना साफ है कि कैथल जैसे जिले में जहां भू-जल में काफी शोरा है, वहां के लिए यह वरदान है। इतना ही नहीं पूरे प्रदेश में इससे आम आदमी को थोड़े से खर्च पर पीने का साफ पानी मिल सकता है। जिससे उन्हें बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है।

कौटिल्य को 25 लाख तो लक्ष्मण की सहायता क्यों नहीं
गांव देवीगढ़ के सरपंच लाल सिंह का कहना है कि सरकार कौटिल्य को 25 लाख रुपये दे सकती है तो लक्ष्मण सिंह की सहायता क्यों नहीं कर सकती। यदि लक्ष्मण सिंह के प्रोजैक्ट को अडॉप्ट करे तो कैथल, हरियाणा ही नहीं पूरे देश को फायदा होगा। लक्ष्मण सिंह गरीबी की हालत में भी समाज कल्याण के  लिए अपनी डेढ़ एकड़ की कमाई को प्रोजेक्टस पर लगा रहे हैं। जो अपने आप में बड़ी बात है। इससे पूर्व भी वे कई प्रोजेक्ट बना चुके हैं।

परिवार की हालत पतली
लक्ष्मण सिंह इस समय प्यौदा रोड स्थित नहर पुल के पास कच्चे मकान में रहते हैं। उनकी गांव में डेढ़ एकड़ की जमीन से जो आमदन होती है, उसका अधिकतर खर्च प्रोजेक्टस पर हो जाता है। जिस कारण परिवार का गुजारा मुश्किल से चल रहा है। परिवार में चार बेटियां एवं एक बेटा है। जो अच्छी शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं।

पहले भी बना चुके हैं प्रोजेक्ट
लक्ष्मण सिंह इससे पूर्व कम बिजली से चलने वाला एयर कंडीशनर, भूमि से पानी निकालने का शिवनल, 1 वाट से 1000 किलोवाट ऊर्जा पैदा करने का यंत्र सहित दर्जनों प्रोजेक्ट बना चुके हैं। जिनमें से कइयों की पेटेंट की प्रक्रिया चल रही है।

मानवता कल्याण ही मकसद
अपने प्रोजेक्ट्स से कोई बड़ी कमाई की आस न रखते हुए लक्ष्मण सिंह का कहना है कि उनकी इच्छा है कि सरकार मानवता के कल्याण के लिए उनके प्रोजेक्टस का प्रयोग करे। उन्हें केवल गुजारे लायक खर्च मिलता रहे।
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