कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में आए दिन मरीजों की परेशानी तो आम हो गई है, लेकिन अब मृतकों व उनके परिजनों को भी परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। हालात इतने खराब हैं कि मेडिकल कॉलेज के जिम्मदार अधिकारी छुट्टी पर हैं और निचले स्तर का स्टाफ अपनी मनमर्जी पर उतारू है। इसका एक नमूना बुधवार को देखने को मिला। अलग-अलग मामलों में मौत का शिकार हुए पांच लोगों के शव पोस्टमार्टम कराने के लिए आए अलग-अलग गांवों के परिजनों को पोस्टमार्टम के लिए दो दिन तक इंतजार करना पड़ा। दूसरे दिन भी लोग पांच घंटे तक डॉक्टर की बाट जोहते रहे।
बुधवार दोपहर तक भी पोस्टमार्टम न होने पर इंतजार में बैठे परिजनों का गुस्सा फूट गया। परिजनों ने प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध जताया। परिजन प्रदर्शन करते हुए डायरेक्टर कार्यालय पहुंचे। जहां से डायरेक्टर के पीए ने उन्हें समझाकर डॉक्टर से बात की। इसके बाद पीए और डॉक्टर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शवों का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के हवाले किए। इसके बाद ही परिजन शव लेकर अपने घरों की ओर लौटे। इस दौरान, परिजनों ने जमकर बवाल काटा। परिजनों ने मिन्नत करते हुए कहा कि, बिना पोस्टमार्टम ही हमारा शव दे दो, जब तक संस्कार नहीं होगा, तब तक घरों में चूल्हा नहीं जलेगा।
जिले में अलग-अलग जगह हादसों का शिकार हुए 5 लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया था। पांच शव मंगलवार शाम को यहां पहुंचे थे। डॉक्टरों ने शव के पोस्टमार्टम के लिए परिजनों को बुधवार सुबह आठ बजे आने का समय दिया था। परिजन सुबह आठ बजे आकर पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठकर डॉक्टर के आने का इंतजार करने लगे। पांच गांवों से आए दर्जनों लोगों ने कई घंटे तक डॉक्टर का इंतजार किया, लेकिन जब डॉक्टर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने डॉक्टर का मोबाइल नंबर लेकर उनसे बात की। डॉक्टर ने लोगों को कोर्ट में होने की बात कहकर फोन काट दिया। जब दोबारा बात की तो डॉक्टर ने कुछ समय में आने की बात कही। इसके बाद डॉक्टर 11 बजे पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचे, परंतु फिर भी डॉक्टर ने यह कहकर पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया कि यहां पर फार्माशिस्ट नहीं है।
फार्मासिस्ट के आने के बाद ही पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके बाद भी 12 बजे तक डॉक्टर नहीं पहुंचा तो गुस्साए परिजनों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन और डॉक्टरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद लोग नारेबाजी करते हुए डायरेक्टर कार्यालय पहुंचे। डायरेक्टर छुट्टी पर होने पर लोगों का गुस्सा ओर ज्यादा बढ़ गया। बाद में पीए प्रताप सिंह ने लोगों को समझाया। हालांकि, गुस्साए लोग डाक्टर के रूम के अंदर तक चले गए, इस दौरान पुलिस ने परिजनों को शांत किया व समझाया। पीए प्रताप और डॉक्टर कुलबीर सिंह 12 बजे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इसके बाद पांचों शवों का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के हवाले कर दिए।
अलग-अलग हादसों में हुई पांच लोगों की मौत
-जिले में अलग-अलग जगह मंगलवार शाम को पांच लोगों की मौत हो गई थी। गांव ऊंचा समाना के सरपंच निशांत राणा ने बताया कि उनके गांव के किसान शमशेर सिंह (40) की मक्के के खेत में दवाई छिड़कते हुए दवाई चढ़ने से हालत खराब हो गई थी। उसेे इलाज के लिए अर्पणा अस्पताल में दाखिल कराया था7 जहां तबियत खराब होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया था। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं दूसरे मामले में सुरत सिंह वासी रूकसाना ने बताया कि उनके गांव कुलदीप सिंह (42) की मौत मंगलौरा चौकी के पास अज्ञात वाहन की चपेट में आने से हुई थी। वह यूपी से गांव की ओर आ रहा था। परिजनों ने बताया कि उसके पास दो छोटी-छोटी बच्चियां हैं। वहीं तीसरे मामले में तुसंग गांव वासी एक व्यक्ति ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई। पुलिस जांच अधिकारी प्रेम ने बताया कि रात को एक गाड़ी के नीचे आने से तुसंग निवासी जयपाल की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। चौथे मामले में दीपक वासी टोहाना ने बताया कि उसके पिता महेंद्र सिंह की मंगलवार शाम को निसिंग में हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। उसके पिता कार चलाते थे, जोकि निसिंग में किसी सवारी को छोड़ने के लिए आए थे। पांचवे मामले में शिव कालोनी में सड़क दुर्घटना में घायल अंग्रेज सिंह (50) वासी मान कालोनी की मौत इलाज के दौरान हो गई थी। मंगलवार को उसके शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया था। जिसका बुधवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम हुआ है।