करनाल। शहर की सड़कों, गलियों और बाजार में घूमने वाले लावारिस कुत्तों से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। नगर निगम ने इन कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी कराने और शेल्टर होम में रखने की योजना पर फिलहाल रोक लगा दी है। चूंकि निगम अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी की जाने वाली स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का इंतजार कर रहा है। ये वे मानक होंगे जिनको ध्यान में रखते हुए आवारा कुत्तों की नसंबदी से लेकर इनके रखरखाव का प्रबंध किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि कई बार कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई पर आपत्ति और विवाद हो जाते हैं। पशु अधिकार संगठनों की शिकायतों के बाद कई शहरों में निगमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो चुकी है। इसीलिए करनाल नगर निगम ने फैसला लिया है कि वह बिना सुप्रीम कोर्ट की एसओपी के कदम नहीं उठाएगा।
शहर के कुछ लोग लगातार निगम से लावारिस कुत्तों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं तो कुछ पशु प्रेमी भी हैं जो पोस्टर बैनर के जरिये पशुओं पर अत्याचार न करने की बात कह रहे हैं। कई वार्डों के पार्षदों ने भी निगम की बैठक में कुत्ता पकड़ने और नसबंदी का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों के झुंड रात में लोगों का पीछा करते हैं, बच्चों और बुजुर्गों को काटने की घटनाएं बढ़ी हैं।
दो माह में दो हजार से ज्यादा लोगों को कुत्तों ने काटा
दो महीने में शहर के अलग-अलग हिस्सों से कुत्ता काटने के 2000 से ज्यादा मामले सिविल अस्पताल में दर्ज हुए हैं। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक जैसे ही सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन जारी होगी, उसके अनुसार टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि शहर से आवारा कुत्तों को पकड़ने व नसबंदी के लिए निगम ने टेंडर दिया है जिसमें निगम करीब 1450 रुपये के हिसाब से कुत्तों की नसबंदी करा रहा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायतों के बाद अब इस पर रोक लगा दी गई है। नगर निगम के डीएमसी अभय सिंह बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी निर्देशों के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।