नेशनल वुशू (सेल्फ डिफेंस का खेल) चैंपियनशिप में पूरे भारतवर्ष में अपनी
धाक जमा चुकी करनाल जिले की खिलाड़ी सुदेश की एशिया में धाक जमाने की राह
में अब पासपोर्ट वैरिफिकेशन सबसे बड़ी अड़चन बन गई है।
एक सप्ताह से यह
खिलाड़ी पासपोर्ट वैरिफिकेशन के लिए यहां से वहां गुहार लगाकर थक चुकी हैं।
अलबत्ता एशियन चैंपियनशिप जीतकर देश की झोली में गोल्ड मेडल डालने की राह
में यही वैरिफिकेशन उनके जीवन की दुविधा बन गया है। ऐसे मेें एशिया में धाक
जमाने के नेशनल चैंपियन के सपने व पूरे प्रदेश की आशाओं को गहरा धक्का लगा
है।
देशभर में आत्मरक्षा में किसी से भी मात नहीं खाने वाली यह खिलाड़ी अब
प्रशासन के सामने घुटने टेकने पर विवश हो गई है। पासपोर्ट वैरिफिकेशन न
होने से अब होनहार खिलाड़ी के मंगोलिया (चाइना और रशिया बॉर्डर) दौरे पर
संकट के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। यदि 30 जून तक वैरिफिकेशन न हुई तो
भोपाल में चल रहे ट्रेनिंग शिविर में सम्मिलित नहीं होने के कारण उनका
मंगोलिया दौरा पूरा नहीं हो पाएगा।
घरौंडा के गांव मलिकपुर में रहने वालीं
सुदेश का मंगोलिया में अगस्त में होने वाली एशियन जूनियर वुशू चैंपियनशिप
में 48 किलोग्राम भारवर्ग में सिलेक्शन हो गया है। इसके लिए सुदेश को
पासपोर्ट की जरूरत है। सुदेश ने बताया कि तहसीलदार रमेश कुमार सिंगला और
डीएसपी रविंद्र के पास वह कई बार वैरिफिकेशन की गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन
उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। सुदेश ने बताया कि घरौंडा थानेे में
एसएचओ नहीं हैं और उनके स्थान पर जो भी व्यक्ति हैं वह भी वैरिफिकेशन में
असमर्थता जाहिर कर चुके हैं। सुदेश की कोच रोमियो मोकल ने बताया कि उन्हें
अभी इस बात का पता चला है। इस मामले को लेकर डीसी से मिलने पहुंचे थे,
लेकिन वह नहीं मिल पाए।
गरीब परिवार से है संबंध
सुदेश घरौंडा के
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 10वीं की छात्र है। उनके पिता शमसेर
सिंह किसान व मां बिमला गृहिणी हैं। सुदेश के तीन भाई हैं। इनमें से दो
पेंटर का काम करते हैं। एक उससे छोटा है। परिवार का गुजर बसर भी मुश्किल से
ही होता है।
सुदेश की उपलब्धियों का सफरनामा
*जनवरी 2015 में छत्तीसगढ़ में आयोजित नेशनल जूनियर वुशू चैंपियनशिप में 45 किलोग्राम भरावर्ग में सिल्वर मेडल।
*वर्ष
2015-15 में फतेहाबाद में आयोजित हरियाणा राज्यस्तरीय वुशू चैंपियनशिप में
गोल्ड मेडल। गोल्ड मेडल आने पर 50 हजार रुपये की नकद राशि से सम्मानित
* जिला स्तरीय चैंपियनशिप में कई गोल्ड व सिल्वर।
मैं
अभी अंडर ट्रेनिंग हूं। लिहाजा जो भी मेरे स्तर पर हो सकता था मैंने सुदेश
के दो जानने वालों को बुलाकर साइन करके दे दिया है। अब तहसीलदार व नायब
तहसीलदार को वैरिफाई करना है। एसएचओ भी वैरिफिकेशन कर सकते हैं।
रविंद्र कुमार, अंडर ट्रेनिंग डीएसपी, घरौंडा।
मेरे पास आईडी नहीं है। इसी कारण पासपोर्ट वैरिफिकेशन मैं नहीं कर सकता।
रमेश कुमार सिंगला, तहसीलदार, घरौंडा।
प्रदेश
की किसी भी बेटी को इस तरह की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। मेरे संज्ञान में
आज ही यह मामला आया है। मैं खुद इस मामले को हल करवाउंगा। सुदेश के एशियन
चैंपियनशिप में जाने की राह में किसी भी रुकावट को नहीं आने दिया जाएगा।
अमरेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री ओएसडी, करनाल
पूरे
मामले की जांच कराई जाएगी। ऐसा क्यों हुआ व इसके लिए जो भी दोषी होंगे उन
पर भी कार्रवाई की जाएगी। हर हाल में बेटी की मदद की जाएगी।
जे गणेशन, डीसी, करनाल