संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। इन्फ्लूएंजा का खतरा बढ़ने पर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बरतने के आदेश दिए हैं, लेकिन इसको लेकर सिविल अस्पताल प्रबंधन सतर्क नजर नहीं आ रहा है। अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बैठे डॉक्टर आने वाले मरीजों पर विशेष ध्यान नहीं दे रहे हैं। रविवार को यहां आने वाले अधिकतर मरीजों काे बिना चेकअप किए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में रेफर कर दिया गया। जिससे ट्रामा सेंटर में आने वाले मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
रविवार को अमर उजाला की टीम सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में मौजूद थी। तभी करीब 12:20 बजे एक एंबुलेंस ट्रामा सेंटर के सामने रुकी। जिसमें से एंबुलेंस का चालक नीचे उतरा और पीछे एंबुलेंस का दरवाजा खोला। जिसमें दो महिलाएं और एक पुरुष नन्ही बच्ची महक को लेकर आए थे। पता चला कि बच्ची को कई दिनों से तेज बुखार, खांसी व जुकाम था। जिसकी तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद वे इंद्री से एंबुलेंस की मदद से सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में लेकर पहुंचे थे। इसके बाद एंबुलेंस चालक ट्रामा सेंटर में गया और डॉक्टर को बच्ची के बारे में बताया, लेकिन ट्रामा सेंटर में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बिना मरीज को देखे चालक से कहा कि यहां अभी बच्चों का डॉक्टर उपलब्ध नहीं है, इसे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ले जाओ। उसके बाद एंबुलेंस चालक उन्हें मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी में ले गया। जहां बच्ची को परिवार सहित बच्चों के डॉक्टर के पास भेजा गया और इलाज शुरू किया गया।
इन्फ्लूएंजा की नहीं शुरू हुई ओपीडी
इन्फ्लूएंजा के सभी लक्षण कोविड के समान हैं। जिसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अलग से फ्लू ओपीडी और वार्ड तैयार करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन रविवार को अस्पताल में आने वाले वायरल मरीजों की कोई सैंपलिंग नहीं की गई। न ही वार्ड तैयार किया जा सका है।
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। ट्रामा सेंटर में आने वाले प्रत्येक मरीज की प्राथमिक जांच करना डॉक्टर का दायित्व है। अगर ऐसा डॉक्टर नहीं कर रहे हैं तो गलत है। इसके बारे में सोमवार को संबंधित डॉक्टर से पूछताछ की जाएगी।
- डॉ. योगेश शर्मा, सिविल सर्जन, करनाल