माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बाढ़ के कारण फसलों को हुए नुकसान को लेकर पोर्टल पर किए गए क्षतिपूर्ति के दावों की तसदीक तय समय में करें। ताकि सरकार समय पर किसानों को मुआवजा उपलब्ध करा सके। इसके अलावा अधिकारियों को सिविल कोर्ट के लंबित केसों में जवाबदेही एवं आपत्ति समय पर फाइल करनी होगी। बुधवार को डीसी उत्तम सिंह ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को ये आदेश जारी किए।
राजस्व अधिकारी की ओर से बताया गया कि जिले में चकबंदी से संबंधी तीन गांवों का कार्य कोर्ट केस के कारण लंबित हैं। उपायुक्त ने हाईकोर्ट से स्टे हटवाने के लिए आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 47 ए के लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए कहा। उपायुक्त ने स्टांप डयूटी, कोर्ट केस, रिकवरी सर्टिफिकेट आदि से संबंधित सरकारी बकाया राशि की वसूली तेज करने के निर्देश दिए। ततिमा कटिंग और मॉडल रिकॉर्ड रूम का कार्य 15 अक्तूबर तक पूरा करने के लिए कहा।
उपायुक्त ने ग्राम सचिव व पटवारियों सहित एसडीएम, तहसील और बीडीपीओ कार्यालयों के कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी सुनिश्चित करने के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। जो कर्मचारी समय पर न आए उनका वेतन अथवा आकस्मिक अवकाश काटा जाए। साथ ही एक महीने के भीतर सर्कल स्तर पर पटवारियों के बैठने के व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में ग्राम सचिवालय बने हुए हैं वहां इनके बैठने का इंतजाम किया जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लें और प्राथमिकता से उनका निपटारा करें। कोई भी व्यक्ति दोबारा उनके (उपायुक्त) पास शिकायत लेकर नहीं पहुंचना चाहिए। कोई नागरिक कार्यालय आकर किसी भी प्रकार की फाइल अथवा आवेदन देता है तो उसे प्राप्ति रसीद अवश्य दें। यह निर्देश भी दिए मूल फाइल अथवा दस्तावेज किसी भी दस्ती न दिए जाएं।
बैठक में एसडीएम करनाल अनुभव मेहता, घरौंडा के राजेश सोनी, इंद्री के अशोक कुमार, डीआरओ मनीष यादव, डीडीपीओ कंचन लता, बीडीपीओ सोमवीर खटकड़, मोनिका, प्रशांत, शिखा के अलावा तहसीलदार व नायब तहसीलदार मौजूद रहे।