कुरुक्षेत्र। ज्योतिसर स्थित श्री गीता कुंज आश्रम बद्रीनारायण मंदिर में चतुर्मास के अवसर पर चले विष्णु सहस्रनाम पाठ एवं हवन यज्ञ में दूर-दराज से श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कंज्यूमर कोर्ट की अध्यक्ष न्यायाधीश डॉ़ नीलिमा शांगला ने कहा कि स्वामी मुक्तानंद मौन व्रत धारण किए हुए हैं। वीरवार को आश्रम परिसर में भगवान वामन जयंती धूमधाम से मनाई गई। लिखित रूप में संदेश देते हुए स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि त्रेतायुग में महाबली राजा बलि पराक्रम और दानशीलता के कारण प्रसिद्ध थे। उन्होंने इंद्रलोक तक पर विजय प्राप्त कर ली थी, जिससे देवता भयभीत हो गए। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार अर्थात् एक बौने ब्राह्मण बालक का रूप धारण किया। वामन भगवान ने बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। पहले पग में उन्होंने पृथ्वी को नापा। दूसरे पग में आकाश को। तीसरे पग के लिए स्थान न बचा, तो बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया। इस प्रकार भगवान ने बलि को पाताल लोक भेजकर देवताओं को उनका अधिकार वापस दिलाया। यह दिन विष्णु भगवान की भक्ति और धर्म की पुनः स्थापना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि वामन अवतार सिखाता है कि अहंकार का पतन निश्चित है और विनम्रता से ही व्यक्ति महान बनता है। बलि का चरित्र यह संदेश देता है कि दान और वचनबद्धता व्यक्ति को अमर बना देते हैं। इस मौके पर आचार्य योगेन्द्र एवं द्वारिका प्रसाद मिश्र ने वेद मंत्रों सहित पूजा-अर्चना करवाई।