- किसानों ने बड़ा गांव में की पंचायत, बागवानी विभाग के मामले से पल्ला झाड़ने पर भड़के
- बोले, मामले की गंभीरता से जांच न करने पर करेंगे आंदोलन, थाना प्रभारी ने पीड़ित किसानों के दर्ज किए बयान
- बागवानी विभाग ने शुरू की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल/कुंजपुरा। किसानों के दस्तावेजों के आधार पर फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये की सब्सिडी मंजूर करा हड़पने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में वीरवार को पीड़ित किसानों ने बड़ा गांव में पंचायत की। जिसमें कुंजपुरा थाना प्रभारी तरसेम और बागवानी विभाग के अधिकारी भी पहुंचे। बागवानी विभाग ने जब इस मामले से उसका कोई लेनादेना नहीं होने की बात कही तो किसानों ने हंगामा कर दिया और नारेबाजी करने लगे।
किसानों ने चेतावनी दी कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।, वहीं, दूसरी ओर बागवानी विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। किसानों ने बताया कि बागवानी विभाग का एक कर्मचारी भी गांव में किसानों के ताजा हस्ताक्षरों का नमूना लेने पहुंचा ताकि फर्जीवाड़े से जुड़ी फाइल में शिकायतकर्ता किसानों के हस्ताक्षरों का मिलान किया जा सके।
किसानों ने कहा कि मामले की गहराई से जांच करने पर इसी तरह के अन्य कई मामलों का खुलासा हो सकता है। किसानों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग के कुछ अधिकारी मामले में सीधी कार्रवाई करने के बजाय शिकायत एवं मामले की फाइल को इधर-उधर घुमाते रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी इस मामले में हुए करोड़ों रुपए की सब्सिडी के फर्जीवाड़े को बीते कई माह से दबाए हुए थे।
किसानों द्वारा विभाग के कार्यालयों में बार-बार चक्कर काटने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। अब पीड़ित किसानों के हंगामे के बाद मामला सुर्खियों में आने पर विभागीय अधिकारियों व आरोपियों के हाथ पैर फूल गए हैं। उधर, दूसरे पक्ष की तरफ से भी एक-दो किसान के खिलाफ करनाल के एक थाने में तहरीर दी गई है। साथ ही फर्जीवाड़े के आरोप को भी नकारा है। इस दौरान थाना प्रभारी ने पीड़ित किसानों के बयान दर्ज किए।
नोटिस आने के बाद हुए हैरान
भाकियू सर छोटूराम के बहादुर मेहला ने बताया कि सैकड़ों किसानों के विभिन्न दस्तावेजों का प्रयोग कर एक लिमिटेड फर्म के नाम पर चार करोड़ 27 लाख रुपए की सब्सिडी मंजूर करवाते हुए 49 लाख 27 हजार का लोन ले लिया गया। कथित फर्जीवाड़े से लिए गए इस लोन से संबंधित नोटिस पीड़ित किसानों के पास पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। किसानों ने बताया कि जब उन्होंने लोन ही नहीं लिया तो किस्त का नोटिस किस बात का दिया गया। किसानों ने बताया कि फर्जीवाड़े की शिकायत देने के बावजूद संबंधित विभाग की तरफ से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। इससे नाराज किसानों ने बुधवार को कुंजपुरा थाने में बवाल काटा था। इसके बाद आज बड़ा गांव में इस मामले को लेकर पीड़ित किसानों की पंचायत बुलाई गई थी।
इससे मेरा लेना देना नहीं : जिला उद्यान अधिकारी
एफपीओ, फॉर्मागेनिक एग्रोटेक प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की परियोजना की स्वीकृति से उनका कोई लेनादेना नहीं है। परियोजना की स्वीकृति जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय की ओर से नहीं की गई। इस परियोजना की स्वीकृति लघु कृषक व्यापार संगठन हरियाणा, पंचकूला की ओर से दी गई है। मामले की जांच शुरू कर दी है। उपनिदेशक (उद्यान) सब्जी उत्कृष्टता केंद्र (सीईवी) घरौंडा डॉ. बिल्लू यादव को सौंपी गई है।
- डॉ. मदन लाल, जिला उद्यान अधिकारी करनाल
एफपीओ को अब तक कोई अनुदान नहीं दिया गया : जांच अधिकारी
एफपीओ, फॉर्मागेनिक एग्रोटेक प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच उन्होंने शुरू कर दी है। इस एफपीओ को लघु कृषक व्यापार संगठन पंचकूला (स्फैक) द्वारा कोई भी अनुदान नहीं दिया गया है। जांच पूरी तरह निष्पक्ष की जाएगी।
- डॉ. बिल्लू यादव, जांच अधिकारी/ उपनिदेशक (उद्यान) सीएवी घरौंडा