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Karnal News: प्रदेश के 98 फीसदी स्कूल बसों में बिना लाइसेंस परिचालक और सहायक तैनात

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- स्कूल बसों में सफाईकर्मी और चपरासी से लेते हैं परिचालक-सहायक का काम
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- प्रदेश के 41 हजार पंजीकृत वाहनों में 35 हजार की हुई जांच, करनाल में जांचे 984 स्कूल वाहनों में सभी परिचालक बिना लाइसेंस



गगन तलवार

करनाल। सुविधा के नाम पर मोटी फीस वसूलने वाले कुछ निजी स्कूलों ने बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करते हुए बसों में सफाई कर्मी, गेट कीपर और चपरासी को परिचालक या महिला सहायक के रूप में तैनात किया हुआ है। परिवहन विभाग के पास पंजीकृत 98 फीसदी बसों में ये परिचालक और महिला सहायक बिना लाइसेंस के ही ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसे में फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाने के बाद भी बसों में बच्चों की जान का जोखिम कम नहीं है।

यह खुलासा महेंद्रगढ़ में स्कूल बस हादसे के बाद प्रदेश भर में अब तक हुई जांच में हुआ है। करनाल जिले की बात करें तो यहां अब तक पंजीकृत 1400 में से 984 स्कूल वाहनों की जांच हो चुकी है, इनमें किसी भी वाहन में परिचालक या महिला सहायक के पास लाइसेंस नहीं मिला। आरटीए निरीक्षक सुरेंद्र सैनी ने बताया कि जांच टीम ने प्रत्येक वाहन के लिए भरे निरीक्षण फार्म के दो नंबर कॉलम (वेलिड कंडक्टर/अटेंडेंट लाइसेंस) के सामने नहीं के विकल्प को भरा है।
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परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह स्थिति अकेले करनाल की ही नहीं बल्कि सभी जिलों की है। विदित हो कि प्रदेश भर में परिवहन विभाग के पास शिक्षण संस्थानों से संबंधित करीब 41 हजार वाहन पंजीकृत हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक करीब 35 हजार वाहनों की जांच हो चुकी है, इनमें से 98 प्रतिशत में परिचालक और महिला सहायक के पास कोई लाइसेंस या ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया है कि जो महिला सहायक ड्यूटी पर आई थी, बस ड्यूटी के बाद स्कूल में वह सफाई कार्य व चपरासी के रूप में भी काम करती है। ब्यूरो
अग्निशमन सिलिंडर तक नहीं चला पाए सहायक-परिचालक
जांच के दौरान जब टीम ने अग्निशमन सिलिंडर जांचे तो परिचालकों और सहायकों का अनुभव जानने के लिए उनसे इन्हें चलाने को कहा गया। इस दौरान कई परिचालक व सहायक सिलिंडर की पिन भी नहीं खोल पाए और कुछ ने गलत तरीके से चलाया था। इसके अलावा सीसीटीवी की रिकार्डिंग भी कई सहायक स्क्रीन पर चला कर नहीं दिखा पाए थे। ऐसे स्कूलों को भी करनाल में नोटिस दिया गया था।
हादसे को टाल सकता है प्रशिक्षित परिचालक

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ तेजपाल और एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि स्कूल बस या रोडवेज व टूरिस्ट बस में प्रशिक्षित परिचालक को ही ड्यूटी पर लगाया जाता है। ताकि उसे सड़क सुरक्षा के नियमों की जानकारी हो और जरूरत पड़ने पर वह बस चला सके। पिछले दिनों करनाल में एक रोडवेज बस के चालक का हार्ट फेल हो गया था, इस दौरान तीन किलोमीटर तक परिचालक ही बस को संभालते हुए आगे लेकर गया था। यदि परिचालक प्रशिक्षित न होता तो हादसा हो सकता था। अभिभावक संघ के सदस्य एडवोकेट अंशुल चौधरी का कहना है कि यह स्थिति स्कूल बसों में भी हो सकती है। प्रशिक्षित परिचालक ही ड्यूटी पर लगाए जाने चाहिए।
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सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के 27 बिंदुओं पर स्कूली वाहनों की जांच की जाती है। करनाल में जांच में सामने आया है कि परिचालकों एवं महिला सहायकों के पास लाइसेंस नहीं मिला। अनुभवी एवं प्रशिक्षित लाइसेंस धारक परिचालकों को ही ड्यूटी पर लगाने के लिए स्कूलों को भी निर्देशित किया गया है। मुख्यालय स्तर पर भी रिपोर्ट भेज दी है।
- विजय देसवाल, डीटीओ
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