संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक के विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए अंक सुधार के लिए अतिरिक्त अवसर देने का फैसला लिया है। अब दो बार अंक सुधार का मौका मिलेगा।
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 12वीं की मुख्य वार्षिक परीक्षा 25 फरवरी से जबकि 10वीं की परीक्षा 26 फरवरी से शुरू होगी। पहली परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों को जुलाई माह में दूसरी वार्षिक परीक्षा के रूप में अंक सुधार का मौका दिया जाएगा। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में किसी विषय की प्रैक्टिकल परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया, तो वह दूसरी परीक्षा में केवल प्रैक्टिकल दे सकता है। यदि छात्र पहली परीक्षा में लिखित और प्रैक्टिकल दोनों में अनुपस्थित रहा है, तो उसे दोनों की परीक्षा देनी होगी। पहली परीक्षा में अतिरिक्त विषय लेने वाले छात्र दूसरी परीक्षा में अधिकतम तीन विषयों में ही शामिल हो सकेंगे। वहीं जिन्होंने पहली परीक्षा में अतिरिक्त विषय नहीं लिया, वे दूसरी परीक्षा में भी अतिरिक्त विषय नहीं ले सकेंगे।
बेहतर प्रदर्शन वाले अंक ही होंगे फाइनल
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अंकपत्र में उसी परीक्षा के अंक जोड़े जाएंगे, जिसमें छात्र का प्रदर्शन बेहतर रहेगा। पहली और दूसरी वार्षिक परीक्षा को मिलाकर एक ही परीक्षा माना जाएगा और अंतिम परिणाम उसी के आधार पर जारी होगा।
दूसरी परीक्षा सिर्फ संस्थागत छात्रों के लिए
बोर्ड के अनुसार दूसरी वार्षिक परीक्षा केवल संस्थागत छात्रों के लिए होगी। वही छात्र इस परीक्षा के पात्र होंगे, जो पहली वार्षिक परीक्षा में शामिल हुए हों। पहली परीक्षा के बाद दोबारा जांच, पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका की कॉपी की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी। दूसरी परीक्षा के बाद यह सुविधा सिर्फ उन्हीं विषयों तक सीमित रहेगी, जिनकी परीक्षा दोबारा दी गई है।
- यूएमसी वाले छात्र नहीं दे सकेंगे दूसरी परीक्षा
जिन छात्रों पर पहली परीक्षा में यूएमसी यानी कि नकल का मामला दर्ज हुआ है, वे दूसरी वार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। हालांकि जिन छात्रों का किसी कारणवश पेपर रद्द हुआ है, उन्हें दूसरी परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी। पहली वार्षिक परीक्षा में फेल, कंपार्टमेंट आने वाले या अपने अंकों से संतुष्ट न होने वाले छात्र एक से तीन विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। शर्त होगी कि छात्र ने पहली परीक्षा में कम से कम एक मुख्य विषय पास किया हो। दूसरी परीक्षा में छात्र विषय नहीं बदल सकेंगे और उन्हीं विषयों की परीक्षा दे सकेंगे, जिनमें पहली बार शामिल हुए थे।