संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ठंड, धूप से दूरी और बढ़ती सुस्ती सर्दियों में ये आम है। मधुमेह पीड़ितों के लिए यह सही नहीं है। ठंड में अनियंत्रित शुगर अस्पताल पहुंचने की बड़ी वजह बन रही है। जिला नागरिक अस्पताल की जनरल ओपीडी में रोजाना औसतन करीब 250 मरीज पहुंच रहे हैं, इनमें से हर दसवां मरीज अनियंत्रित मधुमेह का मिल रहा है।
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर ने बताया कि सर्दियों में शरीर की कार्यप्रणाली बदल जाती है। ठंड के कारण इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रह पाता। ऊपर से लोग सुबह-शाम की सैर, योग और व्यायाम लगभग छोड़ देते हैं, जिसका सीधा असर शुगर लेवल पर पड़ता है। डॉ. कुलबीर के अनुसार ओपीडी में आने वाले मरीजों में केवल पहले से मधुमेह से पीड़ित ही नहीं हैं बल्कि बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिनमें अन्य बीमारियों की जांच के दौरान मधुमेह की पुष्टि हो रही है। विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, किडनी से जुड़ी बीमारियां, मोटापा, थायरॉइड और सर्दी-खांसी और बार-बार संक्रमण से जूझ रहे मरीजों में शुगर अधिक पाई जा रही है। कई मामलों में मरीजों को पहली बार यह जानकारी मिल रही है कि वे मधुमेह से ग्रस्त हैं।
समय रहते नहीं चेते तो गंभीर समस्या : डॉ. कुलबीर के अनुसार समय रहते शुगर को नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका सीधा असर हृदय, किडनी और आंखों पर पड़ सकता है। लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर रहने से हृदयाघात, किडनी खराब होने, नसों में कमजोरी और आंखों की रोशनी कम होने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं। किसी भी तरह की कमजोरी, अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब या घाव देर से भरने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।