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Karnal News: बुजुर्गों को हाथों से अपने खिलाकर तो देखो, किस्मत तुम्हारी बदल जाएगी, मीठा इनसे बतिया कर तो देखो

Tue, 18 Nov 2025 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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डॉ. एपी जैन की पुस्तक का विमोचन करते अति​थि और अन्य। स्रोत : मंच
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पानीपत। आर्य पीजी कॉलेज में अंकन साहित्यिक मंच के बैनर तले कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एपी जैन की आत्मकथात्मक पुस्तक यादों की यात्रा : मैं चला डगर डगर का लोकार्पण किया। इसके साथ कवि गोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान बुजुर्गों को हाथों से अपने खिलाकर तो देखो, किस्मत तुम्हारी बदल जाएगी, मीठा इनसे बतिया कर तो देखो समेत कई रचनाओं को लोगों ने सराहा।
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इसकी अध्यक्षता आशुतोष अग्निहोत्री ने की। मुख्यातिथि पाइट शिक्षण संस्था के चेयरमैन हरिओम तायल और सारस्वत अतिथि गीता विश्वविद्यालय के चांसलर एसपी बंसल रहे। कार्यक्रम संरक्षक प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता और विशिष्ट अतिथि चेतन स्कूलों के ट्रस्टी दीपचंद्र निर्मोही व समाजसेवी कपिल जैन रहे। कार्यक्रम की सूत्रधार सोनिया सोनम अक्स रही। कार्यक्रम के प्रायोजक संदीप- एकता जैन, अमित-सीमा जैन, अंकित-श्वेता जैन और तनम, जयम, पहल व अयाना जैन रहे। उन्हाेंने डॉ. एपी जैन को शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर अनिरुद्ध सिंह, प्रदीप चौहान दीप, खुशबू जैन, सुषमा भाटिया, कल्पना गुलाटी, मीना दहूजा, ईश्वर जैन, संजय जैन, संदीप जैन, अजेश जैन मौजूद रहे।

धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने कहा कि मैं चला डगर डगर, ढूंढता हसीं सफर, धूप-छांव थी भले, पर डटा रहा हुनर, हौसलों की आग थी, मुश्किलों को रौंदती, रब ने मुझको सब दिया, हर घड़ी करूं शुकर।।
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सोनिया सोनम अक्सने कहा कि अपनी रंगत, अपनी सांसे, अपना लहजा जीना है, माटी में रहकर माटी को जर्रा जर्रा जीना है, उसके नाम की मय है तो फिर साकी जाम लबालब भर, चुस्की चुस्की पीकर मुझको कतरा कतरा जीना है।।

सूरज स्वरांश ने कहा कि पतझड़ में भी बासंती, सबको अहसास दिलाता हूं, अंधियारे को रोशन कर, मैं सूरज भी कहलाता हूं। मैं मूर्ख, अज्ञानी हूं, मुझको सुर-लय का ज्ञान नहीं, बस धड़कन की धक-धक में, शब्दों के रंग सजाता हूं। धीरज कपूर ने कहा कि शुभ आगमन हुआ आपका, यू शरद ऋतु की पहली धूप, मात्र विचारों के स्पर्श से, खिल खिल जाता मेरा रूप। तन सुंदर, मन सुंदर, सुंदर हर स्वरुप है, दिव्य लालिमा मेरे चेहरे की, तेरा ही प्रतिरूप है। जवाहरलाल शर्मा ने कहा कि पतझड़ में पत्ते गिरते हैं, पेड़ नहीं गिर जाना है। दूर नजर दौड़ा कर देखो, फिर बसंत बहार को लाना है। कमलेश कुमार पालीवाल कमलने डॉक्टर ने चाय छोड़ने को कहा तो हमने डॉक्टर को ही छोड़ दिया, उसे भ्रम था हमें ठीक करने का हमने उसका सारा भ्रम की तोड़ दिया। आराधना सिंह अनु ने कहा कि कौन किसके संग निभाए सब सिकंदर हो गए, हो गया उल्लू जो सीधा, घर के अंदर हो गए। इक कहानी बन गए, रिश्ते वफाएं, दोस्ती, दिल यहां अब रेत के गहरे समंदर हो गए। कमल नयन वर्मा ने कहा कि बुजुर्गों को सामने बैठ कर तो देखो, हाथों से अपने खिलाकर तो देखो। किस्मत तुम्हारी बदल जाएगी, मीठा इनसे बतिया कर तो देखो।।
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गुलशन सपड़ा ने कहा कि जहां तक भी मुझसे मतलब है जहां को, वहीं तक ही मुझको पूछा जा रहा है, जमाने पर भरोसा करने वालों, भरोसे का जमाना जा रहा है।।
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