एनएफएल प्रबंधन खाद बनाकर बेशक जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का दावा कर रहा हो, लेकिन उनके यहां से निकलने वाले कचरे से आसपास की कॉलोनियों व गांवों के लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्रबंधन की अनदेखी से आसपास की कॉलोनियों व गांवों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने लगी है। यहां की कॉलोनी व गांवों में जहां कई बुजुर्ग दमे के शिकार हैं, वहीं बच्चों को आंखों में जलन की बीमारी है।
एनएफएल द्वारा अन्य सुविधाओं के बाद केंद्रीय विद्यालय की मदद में हाथ खींचने के बाद लोगों में रोष बढ़ गया है। हालांकि एनएफएल प्रबंधन आसपास की कॉलोनियों व गांवों में हरसंभव मदद करने का दावा कर रहा है। नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड से निकलने वाली राख एक बार फिर मुद्दा बनकर उठ गई है। विकास नगर, नांगल खेड़ी ही नहीं आसपास की आधा दर्जन कॉलोनियों में राख का असर है। यहां के लोग राख को लेकर लंबे समय से परेशान हैं और कई बार आवाज उठा चुके हैं।
यहां-यहां पड़ता है असर
एनएफएल से विकास नगर व नांगल खेड़ी गांव को सबसे ज्यादा नुकसान है। अकेले विकास नगर में 22 हजार लोग हैं। एनएफएल की राख के चलते यहां की प्रापर्टी की ग्रोथ रुक गई है। यही हाल नांगल खेड़ी गांव का है। इसके अलावा आजाद नगर, राजनगर, आशाराम कॉलोनी, संजय कॉलोनी, न्यू संजय कॉलोनी व गणेश नगर के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
एनएफएल की राख से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। लोगों की मुश्किल लगातार बढ़ रही है। एनएफएल प्रबंधन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
रामनिवासी गुलिया, स्थानीय निवासी
एनएफएल की राख से दमे व आंखों की बीमारी से लोग ग्रस्त हो रहे हैं। बुजुर्ग ही नहीं युवा वर्ग भी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। यहां पर स्वास्थ्य जांच शिविर तक नहीं लगाया जा रहा। लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
नरेश जांगड़ा, स्थानीय निवासी
एनएफएल की राख की परेशानी गर्मियों में बढ़ जाती है। हवा चलने के बाद लोगों का बाहर निकलना भी मुहाल हो जाता है। वे किसी भी मौसम में खुले में कपड़े तक नहीं सूखा पाते।
रजनीश शर्मा, स्थानीय निवासी
एनएफएल प्रबंधन का आसपास विकास के दावे झूठे हैं। प्रबंधन द्वारा आवाज उठाने के बाद ही काम कराया जाता है। वे कॉलोनियों व गांवों में विकास कराने की तरफ कोई ध्यान नहीं देते जिससे लोगों की मुश्किल बढ़ रही है।
रवि बंसल, स्थानीय निवासी
अधिकारियों का दावा
एनएफएल अधिकारी आसपास के गांवों व कॉलोनी ही नहीं दूर के गांवों में भी विकास कराने का दावा कर रहे हैं। एनएफएल प्रबंधन की मानें तो उनके सबसे नजदीक विकास नगर में गंदे पानी की निकासी को लेकर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। यहां से करीब चार लाख रुपये की लागत से नाला बनाकर नांगल खेड़ी की तरफ एक बड़े नाले के साथ जोड़ा गया है। विकास नगर में समय-समय पर विकास कराया जा रहा है और यहां पर किसी तरह के काम की जरूरत नहीं है। एनएफएल ने विकास का क्षेत्र बढ़ा दिया है और महराना व हडताडी गांव में भी विकास कराया है।
एनएफएल द्वारा आसपास की कॉलोनियों व गांवों में किसी तरह का सहयोग नहीं किया जा रहा है। विकास नगर में चारों तरफ गंदा पानी जमा है। गलियों की भी चार-पांच माह से सफाई नहीं हो सकी है। एनएफएल की राख आने से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं और प्रबंधन इस तरह कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है।
रामचंद्र कादियान, पार्षद पति वार्ड नंबर-14 पानीपत
एनएफएल आसपास की कॉलोनियों व गांवों में स्वास्थ्य जांच शिविर व अन्य विकास कार्य करवाता है। यहां पर सामुदायिक केंद्र व चौपाल बनवाने के साथ पेयजल को लेकर हैंडपंप लगवाए गए हैं। महराना व हडताडी गांव में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। विकास नगर के गंदे पानी की निकासी को लेकर नाला बनाया गया है।
संजीव आर्य, मैनेजर पीआर, एनएफएल पानीपत