करनाल। सीईटी के लिए बनाया गया कंट्रोल रूम अभ्यर्थियों के लिए काफी मददगार साबित हुआ। रास्ता भटके अभ्यर्थियों को केंद्र तक पहुंचाने, हादसे में घायल को उपचार दिलाने, बस छूटने पर वाहन उपलब्ध कराने में कंट्रोल रूम से मदद मिली। एक अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में उसकी सीट पर उपचार उपलब्ध कराया गया। उनके सिर में चोट लगी थी और खून बह रहा था। गर्भवती के लिए विशेष बस भेजी गई।
संत निक्का सिंह स्कूल के परीक्षा केंद्र में अभ्यर्थी के सिर से खून बह रहा था। जींद की अभ्यर्थी को बस में अचानक ब्रेक लगाने से सिर पर चोट लगी थी। शुरू में ध्यान नहीं दिया। परीक्षा के दौरान सिर से खून बहने लगा। कंट्रोल रूम पर सूचना देने पर छात्रा को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चलती परीक्षा के दौरान प्राथमिक उपचार दिया।
नरवाना की चार महिला अभ्यर्थियों की बस छूट गई थी। इनमें एक गर्भवती भी थी। कंट्रोल रूम पर सूचना दिए जाने पर रविवार को रात 8 बजे विशेष रूप से मिनी बस से सभी से घर तक पहुंचाया गया।
लघु सचिवालय के शिक्षा विभाग में 25 जुलाई को स्थापित कंट्रोल रूम में 27 जुलाई की रात 11 बजे तक 976 कॉल आईं। हर कॉल पर मदद पहुंचाई गई। परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों ने मुख्य रूप से बसें कहां से मिलेंगी, जींद से आने के बाद उन्हें कहां उतारा जाएगा, रात में ठहरने के इंतजाम के बारे में जानकारी ली। परीक्षा के दोनों दिन घर जाने, केंद्र की लोकेशन, अंदर की व्यवस्था आदि के बारे जानकारी ली गई।
कंट्रोल रूम में तीन शिफ्ट में चार-चार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। हेल्पलाइन नंबर 0184-2270729 और 82959-81765 पर 30 से ज्यादा कॉल दूसरे जिलों के अभ्यर्थियों ने की। इनमें भिवानी, पंचकूला, पानीपत, सिरसा और कुरुक्षेत्र के अभ्यर्थी शामिल रहे। नोडल अधिकारी रोहताश वर्मा ने बताया कि टीम में संजीव कुमार, दीपक वर्मा, गुलशन कुमार, अशोक कुमार, संजय कुमार, सुमित मान और पवन आदि शामिल रहे।
सर! मुझे बुखार है दवाई मिलेगी क्या...
26 जुलाई को कंट्रोल रूम में परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले कॉल कर दवा के बारे में पूछा गया। कॉल कर रही लड़की ने कहा कि उसे बुखार है, क्या परीक्षा केंद्र के अंदर उसे दवा मिल पाएगी। कंट्रोल रूम से उनको रूम इंचार्ज को सूचना देने के लिए कहा गया। परीक्षा के बाद कंट्रोल रूम से उनके मोबाइल पर कॉल कर हाल जाना गया। अभ्यर्थी ने बताया कि उन्होंने रूम इंचार्ज से संपर्क किया था, हालांकि उनको दवा की जरूरत नहीं पड़ी।