संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। निजी अस्पतालों में इलाज के लिए छह दिन से आयुष्मान कार्ड नहीं चल रहे हैं। आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आह्वान पर अस्पतालों में योजना पात्रों का इलाज बंद है। जिला व उप जिला अस्पताल में भी रोग विशेषज्ञ न मिलने पर अधिकांश तीमारदार निजी अस्पतालों में पैसा देकर मरीजों का इलाज करवा रहे हैं या उन्हें अंबाला के सरकारी व चंडीगढ़ पीजीआई जाना पड़ रहा है।
जिले के 33 निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना से रोज 200 से 250 मरीजों का इलाज होता था। रोज योजना के पात्रों के अलग-अलग बीमारियों में 25 से 30 ऑपरेशन भी होते हैं। छह दिन से योजना के तहत इलाज व ऑपरेशन नहीं हो रहे। अभी तीन दिन और यह परेशानी रहने वाली है। आईएमए के आह्वान पर निजी अस्पताल 15 अगस्त तक योजना के तहत इलाज बंद रखने का ऐलान कर चुके हैं।
इससे पहले सरकार उनकी मांगें मान लेती है, तब वह योजना पात्रों का इलाज शुरू कर देंगे। आईएमए से आयुष्मान भारत योजना के जिला संयोजक डाॅ. जेके गुलाटी ने बताया कि जिले के 33 अस्पतालों का 20 करोड़ रुपये सरकार पर बकाया है। इसी रोष में योजना पात्रों का इलाज बंद किया गया है। उनकी मांग है कि समय पर अस्पतालों को बिलों का भुगतान हो। साथ ही बिलों में कटौती व उन्हें रद्द किया जाना बंद हो। इन मांगों पर सरकार से सहमति नहीं बनने तक इलाज बंद रखेंगे।
बातचीत से समाधान करें
एक निजी अस्पताल पहुंचे राजेंद्र, भूपेश व अनिल ने बताया कि उन्हें पैसा देकर अपने मरीज का ऑपरेशन कराना पड़ रहा है। छह दिन से निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना से इलाज बंद है, जिससे गरीब वर्ग को गंभीर बीमारियों के इलाज में परेशानी आ रही है। सरकार को अस्पतालों से बातचीत कर जल्द समस्या का समाधान निकाला चाहिए।