नगर निगम करनाल एक तरफ स्मार्ट सिटी की दौड़ में अव्वल स्थान पाने को जद्दोजहद कर रहे हैं, वहीं, दूसरी तरफ शहर के ही लोग सीएम सिटी को जाम सिटी बनाने पर तुले हैं। शहर के सभी प्रमुख बाजारों से गुजरने वाली सड़कों पर इस समय रेहड़ी और दुकानदारों का अवैध कब्जा है, जिससे शहर में हर समय जाम रहता है। इस अतिक्रमण से शहरवासियों को राहत दिलाने में अब जिला प्रशासन भी नाकाम साबित हो रहा है।
शहर में अतिक्रमण का यह खेल आज से नहीं बल्कि सालों से चल रहा है, लेकिन अब प्रशासन की अनदेखी के कारण इसमें लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। मेन बाजार, कर्ण गेट, चौड़ा बाजार, घंटा घर चौक, नेहरू प्लेस बाजार, रामनगर जैसे मुख्य बाजार में अवैध रेहड़ी संचालकों व दुकानदारों के अतिक्रमण की वजह से हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। 20 फुट चौड़ी सड़कें भी अब सिमट कर 10 फुट की हो चुकी हैं। वहीं, सड़कों पर दुकानदार व खरीदारों द्वारा बेतरतीब से वाहनों को खड़ा करने से भी जाम को बढ़ावा मिल रहा है। जाम और अतिक्रमण के कारण बाजार के अंदर एक किलोमीटर की दूरी तय करने में भी घंटों लग जाते हैं। यह स्थिति सभी बाजारों में है। आए दिन बाजार में हादसा और झगड़ा हुआ करता है। इस पर नगर निगम और प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
रेहड़ी संचालक देते महीने का किराया
बाजार में दुकानदार के साथ रेहड़ी संचालक भी अतिक्रमण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। रेहड़ी संचालकों ने तो स्थायी दुकानदारों को रेहड़ी लगाने के लिए महीने का किराया देना भी शुरू कर दिया है। यह किराया पांच से दस हजार के बीच सड़क की चौड़ाई के हिसाब से तय होता है। वहीं दूसरी ओर निगम शिकायतें मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
बने सख्त नियम, हो पालन
ऐसा नहीं है कि बाजारों में अवैध कब्जा कराने में सभी दुकानदार शामिल हैं। सैकड़ों ऐसे दुकानदार भी हैं जो शहर को जाम मुक्त देखना चाहते हैं। इसके लिए वे नगर निगम की ओर से 2014 में शहर से अतिक्रमण को खत्म करने के लिए लाई गई यलो लाइन नियम को फिर से चालू करने की वकालत करते हैं। बात दें कि दो साल पूर्व निगम ने बाजारों को अतिक्रमण और जाम मुक्त बनाने के लिए सड़कों पर यलो लाइन बनाई थी। अगर दुकानदार इस यलो लाइन के बाहर अपना सामान रखता था तो उस पर जुर्माना लगाया जाता था। इस नियम से करीब एक साल तक शहर अतिक्रमण मुक्त रहा। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर बदलाव के बाद यह नियम भी बदल गया और शहर फिर से अतिक्रमण की जद में आ गया। अब व्यापारियों द्वारा फिर से दुकानों को उसी यलो लाइन में बांधने की मांग की जा रही है।
टंपरेरी तौर पर दुकानदारों को मिले जगह
बाजारों में अतिक्रमण से इंकार नहीं किया जा सकता। इस समय से आज खरीददार के साथ दुकानदार भी परेशान हैं। कुछ दुकानदार ही अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं, बाकि दुकानदारों को मजबूरी में सड़क पर अपनी दुकान लगानी पड़ती है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि पहले सभी दुकानदारों को टंपरेरी तौर पर दो से चार फुट की जगह दी जाए। इसके बाद अगर प्रशासन कहेगा तो हम खुद अधिकारियों के साथ जाकर अतिक्रमण हटवाने में मदद करेंगे।
-दीपक धवन, जिला प्रधान, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल
नेता दे रहे अतिक्रमण को बढ़ावा
इस समय बाजारों में अतिक्रमण को बढ़ावा देने में नेता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वोट बैंक के खातिर ये नेता अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई नहीं होने देते। इससे बाजारों में लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। इससे छुटकारा पाने का सबसे अच्छा तरीका है कि, नगर निगम फिर से लड़कों पर यलो लाइन लगाए और इसका उल्लंघन न करने वाले दुकानदारों पर भारी भरकम जुर्माना लगाए।
-कृष्ण कुमार तनेजा, करनाल इकाई प्रधान, हरियाणा व्यापार मंडल।
कार्रवाई होती है, लेकिन नहीं मानते दुकानदार
बाजारों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए नगर निगम की तरफ से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन दुकानदार मानते ही नहीं हैं। ऐसे अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने और शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए जल्द ही निगम अभियान चलाएगा। दुकानदारों द्वारा सहयोग नहीं किये जाने के कारण अभियान सफल नहीं हो पाता।
-धीरज कुमार, ईओ, नगर निगम